ग़ुस्से के समय की दुआ

ग़ुस्से के समय की दुआ। सलाम, तारीफ़, शुक्र, छींक, ग़ुस्सा।

“ग़ुस्से के समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“ग़ुस्से के समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “A`ūdhu billāhi minash-Shayṭānir-rajīm”, और इसका अर्थ है: “मैं मरदूद शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/99, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

ग़ुस्से के समय की दुआ: अरबी पाठ

أَعوذُ بِاللهِ مِنَ الشَّيْطانِ الرَّجيم

उच्चारण (लिप्यंतरण)

A`ūdhu billāhi minash-Shayṭānir-rajīm.

हिंदी अर्थ

मैं मरदूद शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “ग़ुस्से के समय की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 7/99।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“ग़ुस्से के समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“ग़ुस्से के समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “A`ūdhu billāhi minash-Shayṭānir-rajīm”, और इसका अर्थ है: “मैं मरदूद शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/99, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“ग़ुस्से के समय की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

मैं मरदूद शैतान से अल्लाह की पनाह माँगता हूँ।

“ग़ुस्से के समय की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): A`ūdhu billāhi minash-Shayṭānir-rajīm.

“ग़ुस्से के समय की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari 7/99। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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