सलाम आम करने की फ़ज़ीलत (3 में से 1)

सलाम आम करने की फ़ज़ीलत। सलाम, तारीफ़, शुक्र, छींक, ग़ुस्सा।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “नबी ﷺ ने फ़रमाया: “तुम जन्नत में दाख़िल नहीं होगे जब तक ईमान न लाओ, और तुम ईमान वाले नहीं होगे जब…”। स्रोत: Muslim 1/74, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सलाम आम करने की फ़ज़ीलत: अरबी पाठ

قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم: (لاَ تَدْخُلُوا الْجَنَّةَ حَتَّى تُؤْمِنُوا، وَلاَ تُؤْمِنُوا حَتَّى تَحَابُّوا، أَوَلاَ أَدُلُّكُم عَلَى شَيْءٍ إِذَا فَعَلْتُمُوهُ تَحَابَبْتُم، أَفْشُوا السَّلاَمَ بَيْنَكُمْ)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

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हिंदी अर्थ

नबी ﷺ ने फ़रमाया: “तुम जन्नत में दाख़िल नहीं होगे जब तक ईमान न लाओ, और तुम ईमान वाले नहीं होगे जब तक एक-दूसरे से मोहब्बत न करो। क्या मैं तुम्हें ऐसी चीज़ न बताऊँ जिसे करने से तुम एक-दूसरे से मोहब्बत करने लगो? आपस में सलाम को आम करो।”

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 1/74।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “नबी ﷺ ने फ़रमाया: “तुम जन्नत में दाख़िल नहीं होगे जब तक ईमान न लाओ, और तुम ईमान वाले नहीं होगे जब…”। स्रोत: Muslim 1/74, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ का अर्थ क्या है?

नबी ﷺ ने फ़रमाया: “तुम जन्नत में दाख़िल नहीं होगे जब तक ईमान न लाओ, और तुम ईमान वाले नहीं होगे जब तक एक-दूसरे से मोहब्बत न करो। क्या मैं तुम्हें ऐसी चीज़ न बताऊँ जिसे करने से तुम एक-दूसरे से मोहब्बत करने लगो? आपस में सलाम को आम करो।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): --

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 1/74। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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