सलाम आम करने की फ़ज़ीलत (3 में से 2)

सलाम आम करने की फ़ज़ीलत। सलाम, तारीफ़, शुक्र, छींक, ग़ुस्सा।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक नीचे अरबी में दी गई है, और इसका अर्थ है: “तीन ख़सलतें हैं, जिसमें ये जमा हो गईं उसने अपना ईमान मुकम्मल कर लिया: इंसाफ़ करना, सब लोगों को सलाम करना और…”। स्रोत: Al-Bukhari, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सलाम आम करने की फ़ज़ीलत: अरबी पाठ

ثَلاَثٌ مَنْ جَمَعَهُنَّ فَقَدْ جَمَعَ الْإِيمَانَ: الْإِنْصَافُ مِنْ نَفْسِكَ، وَبَذْلُ السَّلاَمِ لِلْعَالَمِ، وَالْإِنْفَاقُ مِنَ الإِقْتَارِ

हिंदी अर्थ

तीन ख़सलतें हैं, जिसमें ये जमा हो गईं उसने अपना ईमान मुकम्मल कर लिया: इंसाफ़ करना, सब लोगों को सलाम करना और अपनी थोड़ी-सी कमाई में से (सदक़े के तौर पर) ख़र्च करना।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक नीचे अरबी में दी गई है, और इसका अर्थ है: “तीन ख़सलतें हैं, जिसमें ये जमा हो गईं उसने अपना ईमान मुकम्मल कर लिया: इंसाफ़ करना, सब लोगों को सलाम करना और…”। स्रोत: Al-Bukhari, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ का अर्थ क्या है?

तीन ख़सलतें हैं, जिसमें ये जमा हो गईं उसने अपना ईमान मुकम्मल कर लिया: इंसाफ़ करना, सब लोगों को सलाम करना और अपनी थोड़ी-सी कमाई में से (सदक़े के तौर पर) ख़र्च करना।

“सलाम आम करने की फ़ज़ीलत” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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