तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ (4 में से 2)

तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।

“तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 4 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma raḥmataka arjū”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरी रहमत की उम्मीद रखता हूँ”। स्रोत: Abu Dawud 4/324, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ: अरबी पाठ

اللّهُمَّ رَحْمَتَكَ أَرْجوفَلا تَكِلني إِلى نَفْسي طَرْفَةَ عَيْن،وَأَصْلِحْ لي شَأْني كُلَّهلَا إِلَهَ إِلَّا أنْت

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma raḥmataka arjū falā takilnī ilā nafsī ṭarfata `ayn, wa aṣliḥ lī sha'nī kullah, lā ilāha illā ant.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तेरी रहमत की उम्मीद रखता हूँ। मुझे पलक झपकने (यानी एक लम्हे) के लिए भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर। मेरे सारे मामले दुरुस्त कर दे। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/324।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 4 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma raḥmataka arjū”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरी रहमत की उम्मीद रखता हूँ”। स्रोत: Abu Dawud 4/324, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मैं तेरी रहमत की उम्मीद रखता हूँ। मुझे पलक झपकने (यानी एक लम्हे) के लिए भी मेरे नफ़्स के हवाले न कर। मेरे सारे मामले दुरुस्त कर दे। तेरे सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं।

“तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma raḥmataka arjū falā takilnī ilā nafsī ṭarfata `ayn, wa aṣliḥ lī sha'nī kullah, lā ilāha illā ant.

“तकलीफ़ में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/324। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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