फ़िक्र और ग़म की दुआ (2 में से 1)

फ़िक्र और ग़म की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।

“फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī `abduk”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरा बंदा हूँ”। स्रोत: Ahmad 1/391, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

फ़िक्र और ग़म की दुआ: अरबी पाठ

اللّهُمَّ إِنِّي عَبْدُكَابْنُ عَبْدِكَابْنُ أَمَتِكَنَاصِيَتِي بِيَدِكَمَاضٍ فِيَّ حُكْمُكَعَدْلٌ فِيَّ قَضَاؤكَأَسْأَلُكَ بِكُلِّ اسْمٍ هُوَ لَكَسَمَّيْتَ بِهِ نَفْسَكَأِوْ أَنْزَلْتَهُ فِي كِتَابِكَأَوْ عَلَّمْتَهُ أَحَداً مِنْ خَلْقِكَأَوِ اسْتَأْثَرْتَ بِهِ فِي عِلْمِ الغَيْبِ عِنْدَكَأَنْ تَجْعَلَ القُرْآنَ رَبِيعَ قَلْبِيوَنورَ صَدْرِيوجَلَاءَ حُزْنِيوذَهَابَ هَمِّي

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma innī `abduk, ibnu `abdik, ibnu amatik, nāsiyatī biyadik, māḍin fiyya ḥukmuk, `adlun fiyya qaḍā'uk, as'aluka bikullis’min huwa lak, sammayta bihi nafsak, aw anzaltahu fī kitābik, aw `allamtahu aḥadan min khalqik, aw‘ista'tharta bihi fī `ilmil-ghaybi `indak, an taj`ala ‘l-Qur'āna rabī`a qalbī, wa nūra ṣadrī, wa jalā'a ḥuznī, wa dhahāba hammī.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मैं तेरा बंदा हूँ, तेरे बंदे का बेटा, और तेरी बांदी का बेटा। मेरी पेशानी तेरे हाथ में है (यानी तू मेरे ऊपर इख़्तियार रखता है)। मुझ पर तेरा हुक्म नाफ़िज़ है, और मेरे बारे में तेरा फ़ैसला अदल है। मैं तुझसे हर उस नाम के वास्ते सवाल करता हूँ जो तूने अपने लिए रखा, जो तूने अपनी किताब में उतारा, जो तूने अपनी मख़लूक़ में से किसी को सिखाया, या जिसे तूने अपने पास ग़ैब के इल्म में महफ़ूज़ रखा, कि तू क़ुरआन को मेरे दिल की बहार बना दे, मेरे सीने का नूर, मेरे ग़म को दूर करने वाला, और मेरी परेशानी को हटाने वाला।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “फ़िक्र और ग़म की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ahmad 1/391।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī `abduk”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरा बंदा हूँ”। स्रोत: Ahmad 1/391, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“फ़िक्र और ग़म की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मैं तेरा बंदा हूँ, तेरे बंदे का बेटा, और तेरी बांदी का बेटा। मेरी पेशानी तेरे हाथ में है (यानी तू मेरे ऊपर इख़्तियार रखता है)। मुझ पर तेरा हुक्म नाफ़िज़ है, और मेरे बारे में तेरा फ़ैसला अदल है। मैं तुझसे हर उस नाम के वास्ते सवाल करता हूँ जो तूने अपने लिए रखा, जो तूने अपनी किताब में उतारा, जो तूने अपनी मख़लूक़ में से किसी को सिखाया, या जिसे तूने अपने पास ग़ैब के इल्म में महफ़ूज़ रखा, कि तू क़ुरआन को मेरे दिल की बहार बना दे, मेरे सीने का नूर, मेरे ग़म को दूर करने वाला, और मेरी परेशानी को हटाने वाला।

“फ़िक्र और ग़म की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma innī `abduk, ibnu `abdik, ibnu amatik, nāsiyatī biyadik, māḍin fiyya ḥukmuk, `adlun fiyya qaḍā'uk, as'aluka bikullis’min huwa lak, sammayta bihi nafsak, aw anzaltahu fī kitābik, aw `allamtahu aḥadan min khalqik, aw‘ista'tharta bihi fī `ilmil-ghaybi `indak, an taj`ala ‘l-Qur'āna rabī`a qalbī, wa nūra ṣadrī, wa jalā'a ḥuznī, wa dhahāba hammī.

“फ़िक्र और ग़म की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Ahmad 1/391। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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