फ़िक्र और ग़म की दुआ (2 में से 2)
फ़िक्र और ग़म की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।
“फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma 'innī 'a`ūdhu bika”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/158, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
फ़िक्र और ग़म की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhumma 'innī 'a`ūdhu bika mina ‘l-ḥammi wa ‘l-ḥuzn, wa ‘l-`ajzi wa ‘l-kasal, wa ‘l-bukhli wa ‘l-jubn, wa ḍala`id-dayn, wa ghalabatir-rijāl.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ फ़िक्र और ग़म से, कमज़ोरी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, क़र्ज़ के ग़लबे से और लोगों के दबा लेने से।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “फ़िक्र और ग़म की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 7/158।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “फ़िक्र और ग़म की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma 'innī 'a`ūdhu bika”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/158, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“फ़िक्र और ग़म की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ फ़िक्र और ग़म से, कमज़ोरी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, क़र्ज़ के ग़लबे से और लोगों के दबा लेने से।
“फ़िक्र और ग़म की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma 'innī 'a`ūdhu bika mina ‘l-ḥammi wa ‘l-ḥuzn, wa ‘l-`ajzi wa ‘l-kasal, wa ‘l-bukhli wa ‘l-jubn, wa ḍala`id-dayn, wa ghalabatir-rijāl.
“फ़िक्र और ग़म की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Al-Bukhari 7/158। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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