आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ (11 में से 8)

आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।

“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 11 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma bi `ilmika ‘l-ghayb, wa qudratika `ala ‘l-khalq”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तेरे ग़ैब के इल्म और मख़लूक़ पर तेरी क़ुदरत के वास्ते”। स्रोत: An-Nasa'i 3/54, 55, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ: अरबी पाठ

اللّهُمَّ بِعِلْمِكَ الغَيْبِ وَقُدْرَتِكَ عَلى الْخَلقِأَحْيِني ما عَلِمْتَ الحياةَ خَيْراً لي،وَتَوَفَّني إِذا عَلِمْتَ الوَفاةَ خَيْراً لي،اللّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَشْيَتَكَ في الغَيْبِ وَالشَّهادَةِ،وَأَسْأَلُكَ كَلِمَةَ الحَقِّ في الرِّضا وَالغَضَب،وَأَسْأَلُكَ القَصْدَ في الغِنى وَالفَقْر،أَسْأَلُكَ نَعيماً لا يَنْفَد،وَأَسْأَلُكَ قُرَّةَ عَيْنٍ لا تَنْقَطِعْوَأَسْأَلُكَ الرِّضا بَعْدَ القَضاء،وَأَسْأَلُكَ بًرْدَ الْعَيْشِ بَعْدَ الْمَوْت،وَأَسْأَلُكَ لَذَّةَ النَّظَرِ إِلى وَجْهِكَوَالشَّوْقَ إِلى لِقائِك،في غَيرِ ضَرّاءَ مُضِرَّة، وَلا فِتْنَةٍ مُضلَّة،اللّهُمَّ زَيِّنّا بِزينَةِ الإيمان،وَاجْعَلنا هُداةً مُهْتَدين

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma bi `ilmika ‘l-ghayb, wa qudratika `ala ‘l-khalq, aḥyinī mā `alimta ‘l-ḥayāta khayran lī, wa tawaffanī idhā `alimta ‘l-wafāta khayran lī, Allāhumma innī as'aluka khash’yataka fil-ghaybi wash-shahādah, wa as'aluka kalimata ‘l-ḥaqqi fir-riḍā wa ‘l-ghaḍab, wa as'aluka ‘l-qaṣda fil-ghinā wa ‘l-faqr, wa as'aluka na`īman lā yanfad, wa as'aluka qurrata `aynin lā tanqati`, wa as'alukar-riḍā ba`dal-qaḍā', wa as'aluka barda ‘l-`ayshi ba`da ‘l-mawt, wa as'aluka ladh-dhatan-naẓari ilā wajhik, wash-shawqa ilā liqā'ik, fī ghayri ḍarrā'a muḍirrah, wa lā fitnatin muḍillah, Allāhumma zayyinnā bi zīnati ‘l-'īmān, waj`alnā hudātan muhtadīn.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! तेरे ग़ैब के इल्म और मख़लूक़ पर तेरी क़ुदरत के वास्ते, मुझे ज़िंदा रख अगर तू जानता है कि ज़िंदगी मेरे लिए बेहतर है, और मुझे मौत दे अगर तू जानता है कि मौत मेरे लिए बेहतर है। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सवाल करता हूँ कि तन्हाई और सबके सामने मुझे अपना ख़ौफ़ अता कर। मैं तुझसे ख़ुशी और ग़ुस्से में हक़ बात कहने की तौफ़ीक़ माँगता हूँ। मैं तुझसे मालदारी और मोहताजी में मियानारवी माँगता हूँ। मैं तुझसे ऐसी नेमतें माँगता हूँ जो कभी ख़त्म न हों और आँखों की ऐसी ठंडक (यानी ख़ुशी) जो कभी ख़त्म न हो। मैं तुझसे तेरे फ़ैसले के बाद राज़ी रहने की तौफ़ीक़ माँगता हूँ और तुझसे मौत के बाद ठंडी ज़िंदगी माँगता हूँ। मैं तुझसे तेरे चेहरे की ओर देखने की लज़्ज़त माँगता हूँ, और तुझसे मुलाक़ात का शौक़ माँगता हूँ, इस तरह कि मुझे न कोई नुक़सान पहुँचे और न कोई गुमराह करने वाला फ़ितना। ऐ अल्लाह! हमें ईमान की ज़ीनत से आरास्ता कर और हमें हिदायत पाए हुए रहनुमा बना दे।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: An-Nasa'i 3/54, 55।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 11 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma bi `ilmika ‘l-ghayb, wa qudratika `ala ‘l-khalq”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तेरे ग़ैब के इल्म और मख़लूक़ पर तेरी क़ुदरत के वास्ते”। स्रोत: An-Nasa'i 3/54, 55, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! तेरे ग़ैब के इल्म और मख़लूक़ पर तेरी क़ुदरत के वास्ते, मुझे ज़िंदा रख अगर तू जानता है कि ज़िंदगी मेरे लिए बेहतर है, और मुझे मौत दे अगर तू जानता है कि मौत मेरे लिए बेहतर है। ऐ अल्लाह! मैं तुझसे सवाल करता हूँ कि तन्हाई और सबके सामने मुझे अपना ख़ौफ़ अता कर। मैं तुझसे ख़ुशी और ग़ुस्से में हक़ बात कहने की तौफ़ीक़ माँगता हूँ। मैं तुझसे मालदारी और मोहताजी में मियानारवी माँगता हूँ। मैं तुझसे ऐसी नेमतें माँगता हूँ जो कभी ख़त्म न हों और आँखों की ऐसी ठंडक (यानी ख़ुशी) जो कभी ख़त्म न हो। मैं तुझसे तेरे फ़ैसले के बाद राज़ी रहने की तौफ़ीक़ माँगता हूँ और तुझसे मौत के बाद ठंडी ज़िंदगी माँगता हूँ। मैं तुझसे तेरे चेहरे की ओर देखने की लज़्ज़त माँगता हूँ, और तुझसे मुलाक़ात का शौक़ माँगता हूँ, इस तरह कि मुझे न कोई नुक़सान पहुँचे और न कोई गुमराह करने वाला फ़ितना। ऐ अल्लाह! हमें ईमान की ज़ीनत से आरास्ता कर और हमें हिदायत पाए हुए रहनुमा बना दे।

“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma bi `ilmika ‘l-ghayb, wa qudratika `ala ‘l-khalq, aḥyinī mā `alimta ‘l-ḥayāta khayran lī, wa tawaffanī idhā `alimta ‘l-wafāta khayran lī, Allāhumma innī as'aluka khash’yataka fil-ghaybi wash-shahādah, wa as'aluka kalimata ‘l-ḥaqqi fir-riḍā wa ‘l-ghaḍab, wa as'aluka ‘l-qaṣda fil-ghinā wa ‘l-faqr, wa as'aluka na`īman lā yanfad, wa as'aluka qurrata `aynin lā tanqati`, wa as'alukar-riḍā ba`dal-qaḍā', wa as'aluka barda ‘l-`ayshi ba`da ‘l-mawt, wa as'aluka ladh-dhatan-naẓari ilā wajhik, wash-shawqa ilā liqā'ik, fī ghayri ḍarrā'a muḍirrah, wa lā fitnatin muḍillah, Allāhumma zayyinnā bi zīnati ‘l-'īmān, waj`alnā hudātan muhtadīn.

“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

An-Nasa'i 3/54, 55। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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