ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ (3 में से 3)

ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Huwa ‘l-Awwalu wa ‘l-Ākhir”, और इसका अर्थ है: “(यह आयत पढ़ें) वही अव्वल है और वही आख़िर”। स्रोत: Abu Dawud 4/329, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ: अरबी पाठ

يقرأ قوله تعالى ﴿هُوَ الأوَّلُ، وَالآخِرُ،وَالظّاهِرُ، وَالْباطِنُ،وَهُوَ بِكُلِّ شَيءٍ عَليم﴾

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Huwa ‘l-Awwalu wa ‘l-Ākhir, waẓ-Ẓāhiru wal-Bāṭin, wa huwa bikulli shay'in `Alīm.

हिंदी अर्थ

(यह आयत पढ़ें) वही अव्वल है और वही आख़िर, वही ज़ाहिर है और वही बातिन। और वह हर चीज़ को जानने वाला है (अरबी में)।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 4/329।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Huwa ‘l-Awwalu wa ‘l-Ākhir”, और इसका अर्थ है: “(यह आयत पढ़ें) वही अव्वल है और वही आख़िर”। स्रोत: Abu Dawud 4/329, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

(यह आयत पढ़ें) वही अव्वल है और वही आख़िर, वही ज़ाहिर है और वही बातिन। और वह हर चीज़ को जानने वाला है (अरबी में)।

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Huwa ‘l-Awwalu wa ‘l-Ākhir, waẓ-Ẓāhiru wal-Bāṭin, wa huwa bikulli shay'in `Alīm.

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 4/329। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

और दुआएँ: परेशानी, चिंता और हिफ़ाज़त · सभी दुआएँ