ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ (3 में से 2)

ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Āmantu billāhi wa Rusulih”, और इसका अर्थ है: “(कहें:) मैं अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाया”। स्रोत: Muslim, 1/119-20, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ: अरबी पाठ

يقول« آمنت بالله ورسله»

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Āmantu billāhi wa Rusulih.

हिंदी अर्थ

(कहें:) मैं अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाया।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim, 1/119-20।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Āmantu billāhi wa Rusulih”, और इसका अर्थ है: “(कहें:) मैं अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाया”। स्रोत: Muslim, 1/119-20, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

(कहें:) मैं अल्लाह और उसके रसूलों पर ईमान लाया।

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Āmantu billāhi wa Rusulih.

“ईमान में शक में पड़े शख़्स की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim, 1/119-20। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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