सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ
सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।
“सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti ‘llatī lā yujāwizuhunna barrun wa lā…”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ — जिन्हें न कोई नेक पार कर सकता है और न कोई बद…”। स्रोत: Ahmad 3/419, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti ‘llatī lā yujāwizuhunna barrun wa lā fājirun min sharri mā khalaq, wa bara'a wa dhara', wa min sharri mā yanzilu minas-samā', wa min sharri mā ya`ruju fīhā, wa min sharri mā dhara'a fi ‘l-arḍ, wa min sharri ma yakhruju minhā, wa min sharri fitani ‘llayli wannahār, wa min sharri kulli ṭāriqin illā ṭāriqan yaṭruqu bikhayr yā Rahmān.
हिंदी अर्थ
मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ — जिन्हें न कोई नेक पार कर सकता है और न कोई बद — उसकी पैदा की हुई हर चीज़ की बुराई से, उसकी बनाई और उसकी फैलाई हुई हर चीज़ से, उस चीज़ की बुराई से जो आसमान से उतरती है, और उसकी बुराई से जो उसकी ओर चढ़ती है, उस चीज़ की बुराई से जो उसने ज़मीन में फैलाई, और उसकी बुराई से जो उससे निकलती है, रात और दिन के बुरे फ़ितनों से, और हर रात को आने वाले की बुराई से, सिवाय उस रात को आने वाले के जो भलाई लेकर आए। ऐ रहम करने वाले!
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ahmad 3/419।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti ‘llatī lā yujāwizuhunna barrun wa lā…”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ — जिन्हें न कोई नेक पार कर सकता है और न कोई बद…”। स्रोत: Ahmad 3/419, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ — जिन्हें न कोई नेक पार कर सकता है और न कोई बद — उसकी पैदा की हुई हर चीज़ की बुराई से, उसकी बनाई और उसकी फैलाई हुई हर चीज़ से, उस चीज़ की बुराई से जो आसमान से उतरती है, और उसकी बुराई से जो उसकी ओर चढ़ती है, उस चीज़ की बुराई से जो उसने ज़मीन में फैलाई, और उसकी बुराई से जो उससे निकलती है, रात और दिन के बुरे फ़ितनों से, और हर रात को आने वाले की बुराई से, सिवाय उस रात को आने वाले के जो भलाई लेकर आए। ऐ रहम करने वाले!
“सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti ‘llatī lā yujāwizuhunna barrun wa lā fājirun min sharri mā khalaq, wa bara'a wa dhara', wa min sharri mā yanzilu minas-samā', wa min sharri mā ya`ruju fīhā, wa min sharri mā dhara'a fi ‘l-arḍ, wa min sharri ma yakhruju minhā, wa min sharri fitani ‘llayli wannahār, wa min sharri kulli ṭāriqin illā ṭāriqan yaṭruqu bikhayr yā Rahmān.
“सरकश शैतानों की चाल टालने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Ahmad 3/419। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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