हज या उमरा करने वाले का तलबिया

हज या उमरा करने वाले का तलबिया। सफ़र, शहर, हज और उमरा।

“हज या उमरा करने वाले का तलबिया” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“हज या उमरा करने वाले का तलबिया” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Labbayk Allāhumma labbayk, labbayka lā sharīka laka labbayk. Innal-ḥamda…”, और इसका अर्थ है: “मैं हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह! मैं हाज़िर हूँ”। स्रोत: Muslim 2/841, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

हज या उमरा करने वाले का तलबिया: अरबी पाठ

لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ،لَبَّيْكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ،إِنَّ الْحَمْدَ والنِّعْمَة لَكَ والمُلْكُ،لَا شَرِيكَ لَكَ

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Labbayk Allāhumma labbayk, labbayka lā sharīka laka labbayk. Innal-ḥamda wan-niʿmata laka wal-mulk, lā sharīka lak.

हिंदी अर्थ

मैं हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह! मैं हाज़िर हूँ। मैं हाज़िर हूँ, तेरा कोई साझी नहीं, मैं हाज़िर हूँ। बेशक तारीफ़ और नेमत तेरी ही है, और बादशाहत भी। तेरा कोई साझी नहीं।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “हज या उमरा करने वाले का तलबिया” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 2/841।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“हज या उमरा करने वाले का तलबिया” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“हज या उमरा करने वाले का तलबिया” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Labbayk Allāhumma labbayk, labbayka lā sharīka laka labbayk. Innal-ḥamda…”, और इसका अर्थ है: “मैं हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह! मैं हाज़िर हूँ”। स्रोत: Muslim 2/841, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“हज या उमरा करने वाले का तलबिया” की दुआ का अर्थ क्या है?

मैं हाज़िर हूँ, ऐ अल्लाह! मैं हाज़िर हूँ। मैं हाज़िर हूँ, तेरा कोई साझी नहीं, मैं हाज़िर हूँ। बेशक तारीफ़ और नेमत तेरी ही है, और बादशाहत भी। तेरा कोई साझी नहीं।

“हज या उमरा करने वाले का तलबिया” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Labbayk Allāhumma labbayk, labbayka lā sharīka laka labbayk. Innal-ḥamda wan-niʿmata laka wal-mulk, lā sharīka lak.

“हज या उमरा करने वाले का तलबिया” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 2/841। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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