जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर
जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर। सफ़र, शहर, हज और उमरा।
“जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “नबी ﷺ ने तीनों जमरात पर जो भी कंकरी मारी उसके साथ अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) कहा। फिर आगे बढ़े…”। स्रोत: Al-Bukhari, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
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हिंदी अर्थ
नबी ﷺ ने तीनों जमरात पर जो भी कंकरी मारी उसके साथ अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) कहा। फिर आगे बढ़े, क़िबले की ओर रुख़ करके खड़े हुए, हाथ उठाए और अल्लाह से दुआ की। यह पहले और दूसरे जमरे (को कंकरियाँ मारने) के बाद था। तीसरे जमरे को कंकरियाँ मारीं और हर कंकरी के साथ अल्लाहु अकबर कहा, लेकिन फ़ारिग़ होकर वहाँ (दुआ के लिए) खड़े नहीं हुए, चले गए।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “नबी ﷺ ने तीनों जमरात पर जो भी कंकरी मारी उसके साथ अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) कहा। फिर आगे बढ़े…”। स्रोत: Al-Bukhari, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” की दुआ का अर्थ क्या है?
नबी ﷺ ने तीनों जमरात पर जो भी कंकरी मारी उसके साथ अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) कहा। फिर आगे बढ़े, क़िबले की ओर रुख़ करके खड़े हुए, हाथ उठाए और अल्लाह से दुआ की। यह पहले और दूसरे जमरे (को कंकरियाँ मारने) के बाद था। तीसरे जमरे को कंकरियाँ मारीं और हर कंकरी के साथ अल्लाहु अकबर कहा, लेकिन फ़ारिग़ होकर वहाँ (दुआ के लिए) खड़े नहीं हुए, चले गए।
“जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): --
“जमरात पर हर कंकरी मारते समय तकबीर” की दुआ का स्रोत क्या है?
Al-Bukhari। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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