सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ

सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ। सफ़र, शहर, हज और उमरा।

“सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti min sharri mā khalaq”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से”। स्रोत: Muslim 4/2080, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ: अरबी पाठ

أَعوذُ بِكَلِماتِ اللّهِ التّامّاتِ مِنْ شَرِّ ما خَلَق

उच्चारण (लिप्यंतरण)

A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti min sharri mā khalaq.

हिंदी अर्थ

मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 4/2080।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti min sharri mā khalaq”, और इसका अर्थ है: “मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से”। स्रोत: Muslim 4/2080, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह माँगता हूँ उसकी पैदा की हुई चीज़ों की बुराई से।

“सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): A`ūdhu bikalimāti ‘llāhit-tāmmāti min sharri mā khalaq.

“सफ़र वग़ैरह में कहीं ठहरने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 4/2080। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

और दुआएँ: सफ़र · सभी दुआएँ