इस्तिख़ारा की दुआ

इस्तिख़ारा की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।

“इस्तिख़ारा की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“इस्तिख़ारा की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī astakhīruka bi `ilmik”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के वास्ते तुझसे भलाई का मशवरा माँगता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/162, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

इस्तिख़ारा की दुआ: अरबी पाठ

قال جابر بن عبد الله رضي الله عنهما: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم، يُعلمنا الاستخارة في الأمور كلها كما يعلمُنا السورة من القرآن، يقول: إذا هم أحدكم بالأمر فليركع ركعتين من غير الفريضة، ثم ليقل:«اللهم إني أستخيرك بعلمك،وأستقدرك بقدرتك،وأسألك من فضلك العظيمفإنك تقدِرُ ولا أقدِرُ،وتعلم ولا أعلم،وأنت علام الغيوب،اللهم إن كنت تعلم أن هذا الأمر- يسمي حاجته -خير لي في ديني ومعاشي وعاقبة أمري- أو قال: عاجله وآجله -فاقدره لي ويسره لي،ثم بارك لي فيه،وإن كنت تعلم أن هذا الأمرشر لي في ديني ومعاشي وعاقبة أمري- أو قال: عاجله وآجله -فاصرفه عني واصرفني عنه،واقدر لي الخير حيث كان،ثم ارضني به »وما ندم من استخار الخالق، وشاور المخلوقين المؤمنين وتثبَّت في أمره، فقد قال سبحانه ﴿وَشاوِرْهُم في الأمْرِ فَإِذا عَزَمْتَ فَتَوَكّلْ عَلى الله﴾

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhumma innī astakhīruka bi `ilmik, wa astaqdiruka biqudratik, wa as'aluka min faḍlika ‘l-`Aẓīm, fa'innaka taqdiru wa lā aqdir, wa ta`lamu wa lā a`lam, wa anta `allāmu ‘l-ghuyūb, Allāhumma in kunta ta`lamu anna hādha ‘l-amra - [then mention the thing to be decided] Khayrun lī fī dīnī wa ma`āshī wa `āqibati amrī - [or say] `ājilihi wa ājilih - faqdurhu lī wa yassirhu lī thumma bārik lī fīh, wa in kunta ta`lamu anna hādha ‘l-amra sharrun lī fī dīnī wa ma`āshī wa `āqibati 'amrī - [or say] `ājilihi wa 'ājilihi - faṣrifhu `annī waṣrifnī `anh, waqdur liya ‘l-khayra ḥaythu kān, thumma arḍinī bih.

हिंदी अर्थ

“ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के वास्ते तुझसे भलाई का मशवरा माँगता हूँ, और तेरी क़ुदरत के वास्ते तुझसे ताक़त माँगता हूँ, और तेरे अज़ीम फ़ज़्ल में से सवाल करता हूँ। बेशक तू क़ुदरत रखता है और मैं नहीं रखता, तू जानता है और मैं नहीं जानता, और तू ग़ैब की बातों का जानने वाला है। ऐ अल्लाह! अगर तेरे इल्म में यह मामला [यहाँ उस काम का ज़िक्र करें जिसका फ़ैसला करना है] मेरे दीन, मेरी ज़िंदगी और मेरे अंजाम के लिहाज़ से बेहतर है — [या कहें: दुनिया और आख़िरत में] — तो इसे मेरे लिए मुक़द्दर कर दे और आसान कर दे, फिर इसमें मुझे बरकत दे। और अगर तेरे इल्म में यह मामला मेरे दीन, मेरी ज़िंदगी और मेरे अंजाम के लिहाज़ से बुरा है — [या कहें: दुनिया और आख़िरत में] — तो इसे मुझसे दूर कर दे और मुझे इससे दूर कर दे, और जहाँ कहीं भी भलाई हो वह मेरे लिए मुक़द्दर कर दे, और मुझे उस पर राज़ी कर दे।”

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “इस्तिख़ारा की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari 7/162।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“इस्तिख़ारा की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“इस्तिख़ारा की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī astakhīruka bi `ilmik”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के वास्ते तुझसे भलाई का मशवरा माँगता हूँ”। स्रोत: Al-Bukhari 7/162, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“इस्तिख़ारा की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मैं तेरे इल्म के वास्ते तुझसे भलाई का मशवरा माँगता हूँ, और तेरी क़ुदरत के वास्ते तुझसे ताक़त माँगता हूँ, और तेरे अज़ीम फ़ज़्ल में से सवाल करता हूँ। बेशक तू क़ुदरत रखता है और मैं नहीं रखता, तू जानता है और मैं नहीं जानता, और तू ग़ैब की बातों का जानने वाला है। ऐ अल्लाह! अगर तेरे इल्म में यह मामला [यहाँ उस काम का ज़िक्र करें जिसका फ़ैसला करना है] मेरे दीन, मेरी ज़िंदगी और मेरे अंजाम के लिहाज़ से बेहतर है — [या कहें: दुनिया और आख़िरत में] — तो इसे मेरे लिए मुक़द्दर कर दे और आसान कर दे, फिर इसमें मुझे बरकत दे। और अगर तेरे इल्म में यह मामला मेरे दीन, मेरी ज़िंदगी और मेरे अंजाम के लिहाज़ से बुरा है — [या कहें: दुनिया और आख़िरत में] — तो इसे मुझसे दूर कर दे और मुझे इससे दूर कर दे, और जहाँ कहीं भी भलाई हो वह मेरे लिए मुक़द्दर कर दे, और मुझे उस पर राज़ी कर दे।

“इस्तिख़ारा की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma innī astakhīruka bi `ilmik, wa astaqdiruka biqudratik, wa as'aluka min faḍlika ‘l-`Aẓīm, fa'innaka taqdiru wa lā aqdir, wa ta`lamu wa lā a`lam, wa anta `allāmu ‘l-ghuyūb, Allāhumma in kunta ta`lamu anna hādha ‘l-amra - [then mention the thing to be decided] Khayrun lī fī dīnī wa ma`āshī wa `āqibati amrī - [or say] `ājilihi wa ājilih - faqdurhu lī wa yassirhu lī thumma bārik lī fīh, wa in kunta ta`lamu anna hādha ‘l-amra sharrun lī fī dīnī wa ma`āshī wa `āqibati 'amrī - [or say] `ājilihi wa 'ājilihi - faṣrifhu `annī waṣrifnī `anh, waqdur liya ‘l-khayra ḥaythu kān, thumma arḍinī bih.

“इस्तिख़ारा की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari 7/162। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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