सफ़र से लौटते समय की दुआ
सफ़र से लौटते समय की दुआ। सफ़र, शहर, हज और उमरा।
“सफ़र से लौटते समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“सफ़र से लौटते समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “From every elevated point say”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Bukhari 7/163, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सफ़र से लौटते समय की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
From every elevated point say Allāhu Akbar (three times), and then recite: Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lahu ‘l-mulku, walahu ‘l-ḥamd, wa Huwa `alā kulli shay'in Qadīr, ā'ibūna, tā'ibūna,`ābidūn, li Rabbinā ḥāmidūn, sadaqallāhu wa`dah, wa nasara `abdah, wa hazama ‘l-'aḥzāba waḥdah.
हिंदी अर्थ
हर ऊँचाई पर तीन बार अल्लाहु अकबर (अल्लाह सबसे बड़ा है) कहें, फिर पढ़ें: अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। हम तौबा करते हुए, इबादत करते हुए और अपने रब की तारीफ़ करते हुए लौटने वाले हैं। उसने अपना वादा पूरा किया, अपने बंदे की मदद की, और अकेले ही लश्करों को शिकस्त दी।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सफ़र से लौटते समय की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Bukhari 7/163।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सफ़र से लौटते समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“सफ़र से लौटते समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “From every elevated point say”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Bukhari 7/163, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सफ़र से लौटते समय की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। हम तौबा करते हुए, इबादत करते हुए और अपने रब की तारीफ़ करते हुए लौटने वाले हैं। उसने अपना वादा पूरा किया, अपने बंदे की मदद की, और अकेले ही लश्करों को शिकस्त दी।
“सफ़र से लौटते समय की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): From every elevated point say Allāhu Akbar (three times), Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lahu ‘l-mulku, walahu ‘l-ḥamd, wa Huwa `alā kulli shay'in Qadīr, ā'ibūna, tā'ibūna,`ābidūn, li Rabbinā ḥāmidūn, sadaqallāhu wa`dah, wa nasara `abdah, wa hazama ‘l-'aḥzāba waḥdah.
“सफ़र से लौटते समय की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Bukhari 7/163। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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