मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र
मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र। सफ़र, शहर, हज और उमरा।
“मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र” के अंतर्गत आने वाली दुआ नीचे अरबी में दी गई है, और इसका अर्थ है: “वह (ﷺ) क़सवा (ऊँटनी) पर सवार हुए और मश्अर-ए-हराम पहुँचने तक चले, फिर क़िबले की ओर रुख़ करके अल्लाह से दुआ की…”। स्रोत: Muslim 2/891, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र: अरबी पाठ
हिंदी अर्थ
वह (ﷺ) क़सवा (ऊँटनी) पर सवार हुए और मश्अर-ए-हराम पहुँचने तक चले, फिर क़िबले की ओर रुख़ करके अल्लाह से दुआ की, उसकी बड़ाई और तौहीद बयान की। आप तब तक खड़े रहे जब तक ख़ूब उजाला न फैल गया, फिर सूरज निकलने से पहले रवाना हो गए।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 2/891।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र” के अंतर्गत आने वाली दुआ नीचे अरबी में दी गई है, और इसका अर्थ है: “वह (ﷺ) क़सवा (ऊँटनी) पर सवार हुए और मश्अर-ए-हराम पहुँचने तक चले, फिर क़िबले की ओर रुख़ करके अल्लाह से दुआ की…”। स्रोत: Muslim 2/891, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र” की दुआ का अर्थ क्या है?
वह (ﷺ) क़सवा (ऊँटनी) पर सवार हुए और मश्अर-ए-हराम पहुँचने तक चले, फिर क़िबले की ओर रुख़ करके अल्लाह से दुआ की, उसकी बड़ाई और तौहीद बयान की। आप तब तक खड़े रहे जब तक ख़ूब उजाला न फैल गया, फिर सूरज निकलने से पहले रवाना हो गए।
“मुज़दलिफ़ा में ज़िक्र” की दुआ का स्रोत क्या है?
Muslim 2/891। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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