रोज़े में कोई गाली दे तो
रोज़े में कोई गाली दे तो। खाने से पहले और बाद, इफ़्तार।
“रोज़े में कोई गाली दे तो” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“रोज़े में कोई गाली दे तो” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Innī ṣā'im”, और इसका अर्थ है: “मैं रोज़े से हूँ”। स्रोत: Muslim 2/806, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।
रोज़े में कोई गाली दे तो: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Innī ṣā'im, innī ṣā'im.
हिंदी अर्थ
मैं रोज़े से हूँ। मैं रोज़े से हूँ।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “रोज़े में कोई गाली दे तो” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 2/806।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“रोज़े में कोई गाली दे तो” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“रोज़े में कोई गाली दे तो” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Innī ṣā'im”, और इसका अर्थ है: “मैं रोज़े से हूँ”। स्रोत: Muslim 2/806, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।
“रोज़े में कोई गाली दे तो” की दुआ का अर्थ क्या है?
मैं रोज़े से हूँ। मैं रोज़े से हूँ।
“रोज़े में कोई गाली दे तो” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Innī ṣā'im, innī ṣā'im.
“रोज़े में कोई गाली दे तो” की दुआ का स्रोत क्या है?
Muslim 2/806। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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