इफ़्तार के समय की दुआ (2 में से 1)

इफ़्तार के समय की दुआ। खाने से पहले और बाद, इफ़्तार।

“इफ़्तार के समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “इफ़्तार के समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Dhahabaẓ-ẓama'”, और इसका अर्थ है: “प्यास बुझ गई”। स्रोत: Abu Dawud 2/306, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

इफ़्तार के समय की दुआ: अरबी पाठ

ذَهَبَ الظَّمَأُ،وَابْتَلَّتِ العُروق،وَثَبَتَ الأجْرُ إِنْ شاءَ الله

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Dhahabaẓ-ẓama', wabtallati ‘l-`urūq, wa thabata ‘l-'ajru in shā Allāh.

हिंदी अर्थ

प्यास बुझ गई, नसें तर हो गईं, और अल्लाह ने चाहा तो अज्र पक्का हो गया।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “इफ़्तार के समय की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 2/306।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“इफ़्तार के समय की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “इफ़्तार के समय की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Dhahabaẓ-ẓama'”, और इसका अर्थ है: “प्यास बुझ गई”। स्रोत: Abu Dawud 2/306, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“इफ़्तार के समय की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

प्यास बुझ गई, नसें तर हो गईं, और अल्लाह ने चाहा तो अज्र पक्का हो गया।

“इफ़्तार के समय की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Dhahabaẓ-ẓama', wabtallati ‘l-`urūq, wa thabata ‘l-'ajru in shā Allāh.

“इफ़्तार के समय की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 2/306। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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