दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर (3 में से 3)

दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।

“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Ḥasbunallāhu wa ni`mal-wakīl”, और इसका अर्थ है: “हमें अल्लाह काफ़ी है और वह कितना अच्छा कारसाज़ है”। स्रोत: Al-Bukhari, 5/172, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर: अरबी पाठ

حَسْبُنا اللهُ وَنِعْمَ الوَكيل

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Ḥasbunallāhu wa ni`mal-wakīl.

हिंदी अर्थ

हमें अल्लाह काफ़ी है और वह कितना अच्छा कारसाज़ है।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari, 5/172।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Ḥasbunallāhu wa ni`mal-wakīl”, और इसका अर्थ है: “हमें अल्लाह काफ़ी है और वह कितना अच्छा कारसाज़ है”। स्रोत: Al-Bukhari, 5/172, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” की दुआ का अर्थ क्या है?

हमें अल्लाह काफ़ी है और वह कितना अच्छा कारसाज़ है।

“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Ḥasbunallāhu wa ni`mal-wakīl.

“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” की दुआ का स्रोत क्या है?

Al-Bukhari, 5/172। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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