दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर (3 में से 2)
दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।
“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma anta `aḍudī, wa anta naṣīrī”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तू मेरी ताक़त है और तू ही मेरा सहारा है”। स्रोत: Abu Dawud 3/42, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhumma anta `aḍudī, wa anta naṣīrī, bika ajūlu, wa bika aṣūlu, wa bika uqātil.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! तू मेरी ताक़त है और तू ही मेरा सहारा है। तेरे ही लिए मैं निकलता हूँ, तेरे ही लिए आगे बढ़ता हूँ और तेरे ही लिए लड़ता हूँ।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 3/42।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” के अंतर्गत आने वाली 3 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma anta `aḍudī, wa anta naṣīrī”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! तू मेरी ताक़त है और तू ही मेरा सहारा है”। स्रोत: Abu Dawud 3/42, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! तू मेरी ताक़त है और तू ही मेरा सहारा है। तेरे ही लिए मैं निकलता हूँ, तेरे ही लिए आगे बढ़ता हूँ और तेरे ही लिए लड़ता हूँ।
“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma anta `aḍudī, wa anta naṣīrī, bika ajūlu, wa bika aṣūlu, wa bika uqātil.
“दुश्मन या हाकिम का सामना होने पर” की दुआ का स्रोत क्या है?
Abu Dawud 3/42। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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