यौम-ए-अरफ़ा की दुआ

यौम-ए-अरफ़ा की दुआ। सफ़र, शहर, हज और उमरा।

“यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā 'ilāha 'illallāhu”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/184, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।

यौम-ए-अरफ़ा की दुआ: अरबी पाठ

خير الدعاء دعاء يوم عرفة، وخيرُ ما قلت أنا والنبيُّون من قبلي:لا إله إلا الله وحدهُلا شريك لهُ،لهُ الملكُ ولهُ الحمدُوهو على كل شيء قدير.

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Lā 'ilāha 'illallāhu waḥdahu lā sharīka lahu, lahul-mulku wa lahul-ḥamdu wa huwa `alā kulli shay'in qadīr.

हिंदी अर्थ

अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 3/184।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Lā 'ilāha 'illallāhu”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 3/184, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है। पूरा अरबी पाठ, उच्चारण और अर्थ नीचे दिया गया है।

“यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।

“यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā 'ilāha 'illallāhu waḥdahu lā sharīka lahu, lahul-mulku wa lahul-ḥamdu wa huwa `alā kulli shay'in qadīr.

“यौम-ए-अरफ़ा की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 3/184। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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