रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ

रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ। सफ़र, शहर, हज और उमरा।

“रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Rabbanā ātinā fid-dunyā ḥasanah”, और इसका अर्थ है: “ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे”। स्रोत: Abu Dawud 2/179, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ: अरबी पाठ

﴿رَبَّنَا آتِنَا في الدُّنْيَا حسَنَةًوفي الآخِرَةِ حسَنةًوقِنَا عذَابَ النَّارِ﴾

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Rabbanā ātinā fid-dunyā ḥasanah wa fi ‘l-ākhirati ḥasanah wa qinā `adhāban-nār.

हिंदी अर्थ

ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे, आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 2/179।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

“रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Rabbanā ātinā fid-dunyā ḥasanah”, और इसका अर्थ है: “ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे”। स्रोत: Abu Dawud 2/179, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई दे, आख़िरत में भी भलाई दे, और हमें आग के अज़ाब से बचा।

“रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Rabbanā ātinā fid-dunyā ḥasanah wa fi ‘l-ākhirati ḥasanah wa qinā `adhāban-nār.

“रुक्न-ए-यमानी और हजर-ए-असवद के बीच की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

Abu Dawud 2/179। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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