किसी गिरोह से डर के समय
किसी गिरोह से डर के समय। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।
“किसी गिरोह से डर के समय” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“किसी गिरोह से डर के समय” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhummak-finīhim bimā shi't”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! जिस तरह तू चाहे मुझे उनके मुक़ाबले में काफ़ी हो जा (यानी मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा)”। स्रोत: Muslim 4/2300, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
किसी गिरोह से डर के समय: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhummak-finīhim bimā shi't.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! जिस तरह तू चाहे मुझे उनके मुक़ाबले में काफ़ी हो जा (यानी मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा)।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “किसी गिरोह से डर के समय” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 4/2300।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“किसी गिरोह से डर के समय” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
“किसी गिरोह से डर के समय” के अंतर्गत आने वाली दुआ इस तरह शुरू होती है: “Allāhummak-finīhim bimā shi't”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! जिस तरह तू चाहे मुझे उनके मुक़ाबले में काफ़ी हो जा (यानी मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा)”। स्रोत: Muslim 4/2300, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“किसी गिरोह से डर के समय” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! जिस तरह तू चाहे मुझे उनके मुक़ाबले में काफ़ी हो जा (यानी मेरी हिफ़ाज़त फ़रमा)।
“किसी गिरोह से डर के समय” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhummak-finīhim bimā shi't.
“किसी गिरोह से डर के समय” की दुआ का स्रोत क्या है?
Muslim 4/2300। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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