क़र्ज़ चुकाने की दुआ (2 में से 1)

क़र्ज़ चुकाने की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।

“क़र्ज़ चुकाने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “क़र्ज़ चुकाने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhummak-finī biḥalālika `an ḥarāmik”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मुझे अपने हराम के मुक़ाबले में अपने हलाल से काफ़ी कर दे”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/560, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

क़र्ज़ चुकाने की दुआ: अरबी पाठ

اللّهُمَّ اكْفِني بِحَلالِكَ عَنْ حَرامِك،وَأَغْنِني بِفَضْلِكَ عَمَّنْ سِواك

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Allāhummak-finī biḥalālika `an ḥarāmik, wa 'aghninī bi faḍlika `amman siwāk.

हिंदी अर्थ

ऐ अल्लाह! मुझे अपने हराम के मुक़ाबले में अपने हलाल से काफ़ी कर दे, और अपने फ़ज़्ल से मुझे अपने सिवा सबसे बेनियाज़ कर दे।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “क़र्ज़ चुकाने की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 5/560।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“क़र्ज़ चुकाने की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “क़र्ज़ चुकाने की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhummak-finī biḥalālika `an ḥarāmik”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मुझे अपने हराम के मुक़ाबले में अपने हलाल से काफ़ी कर दे”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/560, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“क़र्ज़ चुकाने की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?

ऐ अल्लाह! मुझे अपने हराम के मुक़ाबले में अपने हलाल से काफ़ी कर दे, और अपने फ़ज़्ल से मुझे अपने सिवा सबसे बेनियाज़ कर दे।

“क़र्ज़ चुकाने की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhummak-finī biḥalālika `an ḥarāmik, wa 'aghninī bi faḍlika `amman siwāk.

“क़र्ज़ चुकाने की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 5/560। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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