दो सज्दों के बीच की दुआ (2 में से 2)
दो सज्दों के बीच की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।
“दो सज्दों के बीच की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “दो सज्दों के बीच की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’ghfir lī, war’ḥamnī”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम कर”। स्रोत: At-Tirmidhi 1/90, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
दो सज्दों के बीच की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhumma’ghfir lī, war’ḥamnī, wahdinī, wajburnī, wa `āfinī, warzuqnī, warfa`nī.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम कर, मुझे हिदायत दे, मुझे सहारा दे, मुझे आफ़ियत दे, मुझे रिज़्क़ दे और मुझे बुलंद कर।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “दो सज्दों के बीच की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 1/90।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“दो सज्दों के बीच की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “दो सज्दों के बीच की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma’ghfir lī, war’ḥamnī”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम कर”। स्रोत: At-Tirmidhi 1/90, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“दो सज्दों के बीच की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम कर, मुझे हिदायत दे, मुझे सहारा दे, मुझे आफ़ियत दे, मुझे रिज़्क़ दे और मुझे बुलंद कर।
“दो सज्दों के बीच की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma’ghfir lī, war’ḥamnī, wahdinī, wajburnī, wa `āfinī, warzuqnī, warfa`nī.
“दो सज्दों के बीच की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
At-Tirmidhi 1/90। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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