सोने से पहले की दुआ (13 में से 2)
सोने से पहले की दुआ। सोने, जागने और ख़्वाब की दुआएँ।
“सोने से पहले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सोने से पहले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 13 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhu lā ilāha illā huwa ‘l-Ḥayyul-Qayyūm”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है”। स्रोत: Al-Baqarah 2:255, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सोने से पहले की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhu lā ilāha illā huwa ‘l-Ḥayyul-Qayyūm, lā ta'khudhuhu sinatun wa lā nawm, lahu mā fis-samāwāti wa māfil-ardh, man dhal-ladhī yashfa`u `indahu illā bi'idhnih, ya`lamu mā bayna aydīhim wa mā khalfahum, wa lā yuḥītūna bishay'im-min `ilmihi illā bimā shā', wasi`a kursiyyuhus-samāwāti wal-ardh, wa lā ya'ūduhu hifẓuhumā, wa huwal-`Aliyyu‘l-`Aẓīm.
हिंदी अर्थ
अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके सामने सिफ़ारिश करे? वह जानता है जो कुछ उनके साथ दुनिया में होता है और जो आख़िरत में होगा। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का घेराव नहीं कर सकते सिवाय उसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। और वही बुलंद और अज़ीम है।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सोने से पहले की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Baqarah 2:255।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सोने से पहले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सोने से पहले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 13 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhu lā ilāha illā huwa ‘l-Ḥayyul-Qayyūm”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है”। स्रोत: Al-Baqarah 2:255, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सोने से पहले की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह! उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, वह हमेशा ज़िंदा है, हर चीज़ को क़ायम रखने और सँभालने वाला है। न उसे ऊँघ आती है और न नींद। जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है। कौन है जो उसकी इजाज़त के बिना उसके सामने सिफ़ारिश करे? वह जानता है जो कुछ उनके साथ दुनिया में होता है और जो आख़िरत में होगा। और वे उसके इल्म में से किसी चीज़ का घेराव नहीं कर सकते सिवाय उसके जो वह चाहे। उसकी कुर्सी आसमानों और ज़मीन को घेरे हुए है, और उनकी हिफ़ाज़त उसे थकाती नहीं। और वही बुलंद और अज़ीम है।
“सोने से पहले की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhu lā ilāha illā huwa ‘l-Ḥayyul-Qayyūm, lā ta'khudhuhu sinatun wa lā nawm, lahu mā fis-samāwāti wa māfil-ardh, man dhal-ladhī yashfa`u `indahu illā bi'idhnih, ya`lamu mā bayna aydīhim wa mā khalfahum, wa lā yuḥītūna bishay'im-min `ilmihi illā bimā shā', wasi`a kursiyyuhus-samāwāti wal-ardh, wa lā ya'ūduhu hifẓuhumā, wa huwal-`Aliyyu‘l-`Aẓīm.
“सोने से पहले की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Al-Baqarah 2:255। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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