आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ (11 में से 7)
आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।
“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 11 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī as'aluka ‘l-jannah”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ”। स्रोत: Ibn Majah 2/328, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhumma innī as'aluka ‘l-jannah wa a`ūdhu bika minan-nār.
हिंदी अर्थ
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ, और तेरी पनाह माँगता हूँ आग से।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Ibn Majah 2/328।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 11 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhumma innī as'aluka ‘l-jannah”, और इसका अर्थ है: “ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ”। स्रोत: Ibn Majah 2/328, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
ऐ अल्लाह! मैं तुझसे जन्नत माँगता हूँ, और तेरी पनाह माँगता हूँ आग से।
“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhumma innī as'aluka ‘l-jannah wa a`ūdhu bika minan-nār.
“आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Ibn Majah 2/328। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
संबंधित दुआएँ
- आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआاللّهُمَّ إِنِّي أَعوذُ بِكَ مِنْ عَذابِ القَبْر،ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ क़ब्र के अज़ाब से, जहन्नम की आग के अज़ाब से, ज़िंदगी और…
- आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआاللّهُمَّ إِنِّي أَعوذُ بِكَ مِنْ عَذابِ القَبْر،ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ क़ब्र के अज़ाब से, और तेरी पनाह माँगता हूँ मसीह दज्जाल …
- आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआاللّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسي ظُلْماً كَثيراًऐ अल्लाह! मैंने अपनी जान पर बहुत ज़ुल्म किया, और तेरे सिवा कोई गुनाह नहीं बख़्शता। तो मुझे…
- आख़िरी तशह्हुद के बाद, सलाम से पहले की दुआاللّهُمَّ اغْفِرْ لي ما قَدَّمْتُ وَما أَخَّرْت،ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे जो मैंने आगे भेजा और जो पीछे छोड़ा, जो मैंने छुपाया और जो मैंने ज़…