हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ (2 में से 2)
हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ। फ़िक्र, मुश्किल, डर और हिफ़ाज़त।
“हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhu Akbar”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह सबसे बड़ा है”। स्रोत: Al-Bukhari, 5/172, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Allāhu Akbar, Allāhu a`azzu min khalqihi jamī`a, Allāhu a`azzu mimmā akhāfu wa aḥdhar, a`ūdhu billāhi ‘l-ladhī lā ilāha illā hū, almumsikis-samāwātis-sab`i an yaqa`na `ala ‘l-arḍi illā bi idhnih, min sharri `abdika [name of the person], wa junūdihi wa atbā`ihi wa ashyā`ih, mina ‘l-jinni wa ‘l-ins, Allāhumma kun lī jāran min sharrihim, jalla thanā'uk, wa `azza jāruk, wa tabāraka-smuk, wa lā ilāha ghayruk.
हिंदी अर्थ
अल्लाह सबसे बड़ा है, अपनी सारी मख़लूक़ से ज़्यादा ताक़तवर। वह उससे ज़्यादा ताक़तवर है जिससे मैं डरता और घबराता हूँ। मैं उस अल्लाह की पनाह माँगता हूँ जिसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वही है जिसने सातों आसमानों को ज़मीन पर गिरने से रोक रखा है, सिवाय उसके हुक्म के। [ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ] तेरे बंदे [उस शख़्स का नाम] की बुराई से, और उसके मददगारों, पैरोकारों और हामियों की बुराई से, चाहे जिन्नों में से हों या इंसानों में से। ऐ अल्लाह! उनकी बुराई के मुक़ाबले में मेरा सहारा बन जा। तेरी तारीफ़ें शान वाली हैं और तेरी पनाह मज़बूत है। तेरा नाम बाबरकत है, तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। (अरबी में तीन बार पढ़ें।)
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Al-Bukhari, 5/172।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 2 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Allāhu Akbar”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह सबसे बड़ा है”। स्रोत: Al-Bukhari, 5/172, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह सबसे बड़ा है, अपनी सारी मख़लूक़ से ज़्यादा ताक़तवर। वह उससे ज़्यादा ताक़तवर है जिससे मैं डरता और घबराता हूँ। मैं उस अल्लाह की पनाह माँगता हूँ जिसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वही है जिसने सातों आसमानों को ज़मीन पर गिरने से रोक रखा है, सिवाय उसके हुक्म के। [ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह माँगता हूँ] तेरे बंदे [उस शख़्स का नाम] की बुराई से, और उसके मददगारों, पैरोकारों और हामियों की बुराई से, चाहे जिन्नों में से हों या इंसानों में से। ऐ अल्लाह! उनकी बुराई के मुक़ाबले में मेरा सहारा बन जा। तेरी तारीफ़ें शान वाली हैं और तेरी पनाह मज़बूत है। तेरा नाम बाबरकत है, तेरे सिवा कोई सच्चा माबूद नहीं। (अरबी में तीन बार पढ़ें।).
“हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Allāhu Akbar, Allāhu a`azzu min khalqihi jamī`a, Allāhu a`azzu mimmā akhāfu wa aḥdhar, a`ūdhu billāhi ‘l-ladhī lā ilāha illā hū, almumsikis-samāwātis-sab`i an yaqa`na `ala ‘l-arḍi illā bi idhnih, min sharri `abdika [name of the person], wa junūdihi wa atbā`ihi wa ashyā`ih, mina ‘l-jinni wa ‘l-ins, Allāhumma kun lī jāran min sharrihim, jalla thanā'uk, wa `azza jāruk, wa tabāraka-smuk, wa lā ilāha ghayruk.
“हाकिम के ज़ुल्म से डरने वाले की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Al-Bukhari, 5/172। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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