सूरह As-Saffat الصافات

182 आयतें · मक्की

सूरह As-Saffat में कितनी आयतें हैं?

सूरह As-Saffat क़ुरआन की 114 सूरतों में 37वीं सूरह है और इसमें 182 आयतें हैं। इसे मक्की माना जाता है।

सूरह का क्रम
37 / 114
आयतें
182
वर्गीकरण
मक्की

29 अक्टूबर 2026 को अपडेट किया. Tanzil Project (tanzil.net), quran-json.

यह सूरह किताब में पढ़ें →

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفًّا ١

क़सम है पंक्तिबद्ध (फ़रिश्तों) की!

فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجْرًا ٢

फिर झिड़क कर डाँटने वालों की!

فَٱلتَّٰلِيَٰتِ ذِكْرًا ٣

फिर (अल्लाह के) ज़िक्र (वाणी) की तिलावत करने वालों की।[1]

टिप्पणियाँ

[1] ये तीनों गुण फ़रिश्तों के हैं जो आकाशों में अल्लाह की इबादत के लिए पंक्तिबद्ध रहते तथा बादलों को हाँकते और अल्लाह के स्मरण जैसे क़ुरआन तथा नमाज़ पढ़ने और उसकी पवित्रता का गान करने इत्यादि में लगे रहते हैं।

إِنَّ إِلَٰهَكُمْ لَوَٰحِدٌ ٤

निःसंदेह तुम्हारा पूज्य निश्चय एक ही है।

رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَرَبُّ ٱلْمَشَٰرِقِ ٥

जो आकाशों और धरती का तथा उन दोनों के बीच की समस्त चीज़ों का स्वामी है और सूर्य के उदय होने के सभी स्थानों का मालिक है।

إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنْيَا بِزِينَةٍ ٱلْكَوَاكِبِ ٦

निःसंदेह हमने संसार के आकाश को एक सुंदर शृंगार के साथ सुशोभित किया है, जो सितारे हैं।

وَحِفْظًا مِّن كُلِّ شَيْطَٰنٍ مَّارِدٍ ٧

और प्रत्येक सरकश शैतान से सुरक्षित करने के लिए।

لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلْمَلَإِ ٱلْأَعْلَىٰ وَيُقْذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍ ٨

वे सर्वोच्च सभा (मला-ए-आ'ला) के फ़रिश्तों की बात नहीं सुन सकते, तथा वे हर ओर से (उल्काओं से) मारे जाते हैं।

دُحُورًا وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ ٩

भगाने के लिए। तथा उनके लिए स्थायी यातना है।

إِلَّا مَنْ خَطِفَ ٱلْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُۥ شِهَابٌ ثَاقِبٌ ١٠

परंतु जो कोई (शैतान फरिश्तों की किसी बात को) अचानक उचक ले जाए, तो एक दहकता हुआ अंगारा (उल्का)[2] उसका पीछा करता है।

टिप्पणियाँ

[2] फिर यदि उससे बचा रह जाए तो आकाश की बात अपने नीचे के शैतानों तक पहुँचाता है और वे उसे काहिनों तथा ज्योतिषियों को बताते हैं। फिर वे उसमें सौ झूठ मिलाकर लोगों को बताते हैं। (सह़ीह़ बुख़ारी : 6213, सह़ीह़ मुस्लिम : 2228)

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَآ إِنَّا خَلَقْنَٰهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍۭ ١١

तो आप इन (काफ़िरों) से पूछें कि क्या इन्हें पैदा करना अधिक कठिन है या उनका जिन्हें[3] हम पैदा कर चुके? निःसंदेह हमने उन्हें[4] एक लेसदार मिट्टी से पैदा किया है।

टिप्पणियाँ

[3] अर्थात फ़रिश्तों तथा आकाशों को। [4] अर्थात् उनके पिता आदम (अलैहिस्सलाम) को।

بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ ١٢

बल्कि आपने आश्चर्य किया और वे उपहास करते हैं।

وَإِذَا ذُكِّرُوا۟ لَا يَذْكُرُونَ ١٣

और जब उन्हें नसीहत की जाए, तो वे क़बूल नहीं करते।

وَإِذَا رَأَوْا۟ ءَايَةً يَسْتَسْخِرُونَ ١٤

और जब वे कोई निशानी देखते हैं, तो खूब उपहास करते हैं।

وَقَالُوٓا۟ إِنْ هَٰذَآ إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ ١٥

तथा कहते हैं कि यह तो मात्र खुला जादू है।

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبْعُوثُونَ ١٦

क्या जब हम मर गए और मिट्टी तथा हड्डियाँ हो चुके, तो क्या सचमुच हम अवश्य उठाए जाने वाले हैं?

أَوَءَابَآؤُنَا ٱلْأَوَّلُونَ ١٧

और क्या हमारे पहले बाप-दादा भी (उठाए जाएँगे)?

قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَٰخِرُونَ ١٨

आप कह दीजिए : हाँ! तथा तुम अपमानित (भी) होगे!

فَإِنَّمَا هِىَ زَجْرَةٌ وَٰحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ ١٩

वह बस एक ही झिड़की होगी, तो एकाएक वे देख रहे होंगे।

وَقَالُوا۟ يَٰوَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ ٱلدِّينِ ٢٠

तथा वे कहेंगे : हाय हमारा विनाश! यह तो बदले का दिन है।

هَٰذَا يَوْمُ ٱلْفَصْلِ ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ٢١

यही निर्णय का दिन है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।

ٱحْشُرُوا۟ ٱلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ وَأَزْوَٰجَهُمْ وَمَا كَانُوا۟ يَعْبُدُونَ ٢٢

(आदेश होगा कि) इकट्ठा करो उन लोगों को जिन्होंने अत्याचार किया तथा उनके साथियों को और जिनकी वे उपासना किया करते थे ।

مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلْجَحِيمِ ٢٣

अल्लाह के सिवा। फिर उन्हें जहन्नम की राह दिखा दो।

وَقِفُوهُمْ إِنَّهُم مَّسْـُٔولُونَ ٢٤

और उन्हें ठहराओ[5], निःसंदेह वे प्रश्न किए जाने वाले हैं।

टिप्पणियाँ

[5] नरक में झोंकने से पहले।

مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ ٢٥

तुम्हें क्या हुआ कि तुम एक-दूसरे की सहायता नहीं करते?

بَلْ هُمُ ٱلْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ ٢٦

बल्कि, आज वे सर्वथा आज्ञाकारी हैं।

وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ ٢٧

और वे एक-दूसरे की ओर रुख़ करके परस्पर प्रश्न करेंगे।[6]

टिप्पणियाँ

[6] अर्थात एक-दूसरे को धिक्कारेंगे।

قَالُوٓا۟ إِنَّكُمْ كُنتُمْ تَأْتُونَنَا عَنِ ٱلْيَمِينِ ٢٨

वे कहेंगे : निःसंदेह तुम हमारे पास दाहिने[7] से आया करते थे।

टिप्पणियाँ

[7] इससे अभिप्राय यह है कि धर्म तथा सत्य के नाम से आते थे। अर्थात यह विश्वास दिलाते थे कि यही मिश्रणवाद मूल तथा सत्धर्म है।

قَالُوا۟ بَل لَّمْ تَكُونُوا۟ مُؤْمِنِينَ ٢٩

वे[8] कहेंगे : बल्कि तुम (स्वयं) ईमान वाले न थे।

टिप्पणियाँ

[8] इससे अभिप्राय उन के प्रमुख लोग हैं।

وَمَا كَانَ لَنَا عَلَيْكُم مِّن سُلْطَٰنٍۭ بَلْ كُنتُمْ قَوْمًا طَٰغِينَ ٣٠

तथा हमारा तुमपर कोई ज़ोर[9] न था, बल्कि तुम (स्वंय) हद से बढ़ने वाले लोग थे।

टिप्पणियाँ

[9] देखिए : सूरत इबराहीम, आयत : 22

فَحَقَّ عَلَيْنَا قَوْلُ رَبِّنَآ إِنَّا لَذَآئِقُونَ ٣١

तो हमपर हमारे पालनहार का कथन सिद्ध हो गया। निःसंदेह हम निश्चय (यातना) चखने वाले हैं।

فَأَغْوَيْنَٰكُمْ إِنَّا كُنَّا غَٰوِينَ ٣٢

तो हमने तुम्हें गुमराह किया। निःसंदेह हम स्वयं गुमराह थे।

فَإِنَّهُمْ يَوْمَئِذٍ فِى ٱلْعَذَابِ مُشْتَرِكُونَ ٣٣

तो निश्चय ही वे उस दिन यातना में सहभागी होंगे।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِٱلْمُجْرِمِينَ ٣٤

निःसंदेह हम अपराधियों के साथ ऐसा ही किया करते हैं।

إِنَّهُمْ كَانُوٓا۟ إِذَا قِيلَ لَهُمْ لَآ إِلَٰهَ إِلَّا ٱللَّهُ يَسْتَكْبِرُونَ ٣٥

निःसंदेह वे ऐसे लोग थे कि जब उनसे कहा जाता कि अल्लाह के सिवा कोई पूज्य (इबादत के योग्य) नहीं, तो वे अभिमान करते थे।

وَيَقُولُونَ أَئِنَّا لَتَارِكُوٓا۟ ءَالِهَتِنَا لِشَاعِرٍ مَّجْنُونٍۭ ٣٦

तथा कहते थे : क्या सचमुच हम अपने पूज्यों को एक दीवाने कवि के कारण छोड़ देने वाले हैं?

بَلْ جَآءَ بِٱلْحَقِّ وَصَدَّقَ ٱلْمُرْسَلِينَ ٣٧

बल्कि वह सत्य लेकर आए हैं तथा उन्होंने सभी रसूलों की पुष्टि की है।

إِنَّكُمْ لَذَآئِقُوا۟ ٱلْعَذَابِ ٱلْأَلِيمِ ٣٨

निःसंदेह तुम निश्चय दुःखदायी यातना चखने वाले हो।

وَمَا تُجْزَوْنَ إِلَّا مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ٣٩

तथा तुम्हें केवल उसी का बदला दिया जाएगा, जो तुम किया करते थे।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ٤٠

परंतु अल्लाह के ख़ालिस (विशुद्ध) किए हुए बंदे।

أُو۟لَٰٓئِكَ لَهُمْ رِزْقٌ مَّعْلُومٌ ٤١

यही लोग हैं, जिनके लिए निर्धारित रोज़ी है।

فَوَٰكِهُ وَهُم مُّكْرَمُونَ ٤٢

प्रत्येक प्रकार के फल। तथा वे सम्मानित किए गए हैं।

فِى جَنَّٰتِ ٱلنَّعِيمِ ٤٣

नेमत के बाग़ों में।

عَلَىٰ سُرُرٍ مُّتَقَٰبِلِينَ ٤٤

तख़्तों पर आमने-सामने बैठे होंगे।

يُطَافُ عَلَيْهِم بِكَأْسٍ مِّن مَّعِينٍۭ ٤٥

उनपर प्रवाहित शराब के प्याले फिराए जाएँगे।

بَيْضَآءَ لَذَّةٍ لِّلشَّٰرِبِينَ ٤٦

जो सफ़ेद होगी, पीने वालों के लिए स्वादिष्ट होगी।

لَا فِيهَا غَوْلٌ وَلَا هُمْ عَنْهَا يُنزَفُونَ ٤٧

न उसमें कोई सिरदर्द होगा, और न वे उससे मदहोश होंगे।

وَعِندَهُمْ قَٰصِرَٰتُ ٱلطَّرْفِ عِينٌ ٤٨

तथा उनके पास दृष्टि नीची रखने वाली, बड़ी आँखों वाली स्त्रियाँ होंगी।

كَأَنَّهُنَّ بَيْضٌ مَّكْنُونٌ ٤٩

मानो वे छिपाकर रखे हुए अंडे हों।[10]

टिप्पणियाँ

[10] अर्थात जिस प्रकार पक्षी के पंखों के नीचे छिपे हुए अंडे सुरक्षित होते हैं, वैसे ही वे नारियाँ सुरक्षित, सुंदर रंग और रूप की होंगी।

فَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَآءَلُونَ ٥٠

फिर वे एक-दूसरे के सम्मुख होकर आपस में प्रश्न करेंगे।

قَالَ قَآئِلٌ مِّنْهُمْ إِنِّى كَانَ لِى قَرِينٌ ٥١

उनमें से एक कहने वाला कहेगा : मेरा एक साथी था।

يَقُولُ أَءِنَّكَ لَمِنَ ٱلْمُصَدِّقِينَ ٥٢

वह कहा करता था कि क्या सचमुच तू भी (मरणोपरांत पुनर्जीवन को) मानने वालों में से है?

أَءِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَدِينُونَ ٥٣

क्या जब हम मर गए और हम मिट्टी तथा हड्डियाँ हो गए, तो क्या सचमुच हम अवश्य बदला दिए जाने वाले हैं?

قَالَ هَلْ أَنتُم مُّطَّلِعُونَ ٥٤

वह कहेगा : क्या तुम झाँककर देखने वाले हो?

فَٱطَّلَعَ فَرَءَاهُ فِى سَوَآءِ ٱلْجَحِيمِ ٥٥

फिर वह झाँकेगा, तो उसे भड़कती हुई आग के बीच में देखेगा।

قَالَ تَٱللَّهِ إِن كِدتَّ لَتُرْدِينِ ٥٦

कहेगा : अल्लाह की कसम! निश्चय तू क़रीब था कि मुझे नष्ट ही कर दे।

وَلَوْلَا نِعْمَةُ رَبِّى لَكُنتُ مِنَ ٱلْمُحْضَرِينَ ٥٧

और यदि मेरे पालनहार की अनुकंपा न होती, तो निश्चय मैं भी (जहन्नम में) उपस्थित किए गए लोगों में से होता।

أَفَمَا نَحْنُ بِمَيِّتِينَ ٥٨

तो क्या (यह सही नहीं है) कि हम कभी मरने वाले नहीं हैं?

إِلَّا مَوْتَتَنَا ٱلْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُعَذَّبِينَ ٥٩

सिवाय अपनी प्रथम मौत के, और न हम कभी यातना दिए जाने वाले हैं।

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْفَوْزُ ٱلْعَظِيمُ ٦٠

निश्चय यही तो बहुत बड़ी सफलता है।

لِمِثْلِ هَٰذَا فَلْيَعْمَلِ ٱلْعَٰمِلُونَ ٦١

इसी (जैसी सफलता) के लिए कर्म करने वालों को कर्म करना चाहिए।

أَذَٰلِكَ خَيْرٌ نُّزُلًا أَمْ شَجَرَةُ ٱلزَّقُّومِ ٦٢

क्या यह आतिथ्य उत्तम है या थोहड़ का वृक्ष?

إِنَّا جَعَلْنَٰهَا فِتْنَةً لِّلظَّٰلِمِينَ ٦٣

निःसंदेह हमने उसे अत्याचारियों के लिए एक परीक्षा बनाया है।

إِنَّهَا شَجَرَةٌ تَخْرُجُ فِىٓ أَصْلِ ٱلْجَحِيمِ ٦٤

निःसंदेह वह ऐसा वृक्ष है, जो जहन्नम के तल में उगता है।

طَلْعُهَا كَأَنَّهُۥ رُءُوسُ ٱلشَّيَٰطِينِ ٦٥

उसके गुच्छे ऐसे हैं मानो वे शैतानों के सिर हों।

فَإِنَّهُمْ لَـَٔاكِلُونَ مِنْهَا فَمَالِـُٔونَ مِنْهَا ٱلْبُطُونَ ٦٦

तो वे (जहन्नमवासी) निश्चय उसमें से खाने वाले हैं। फिर उससे पेट भरने वाले हैं।

ثُمَّ إِنَّ لَهُمْ عَلَيْهَا لَشَوْبًا مِّنْ حَمِيمٍ ٦٧

फिर निःसंदेह उनके लिए उसपर खौलते हुए पानी का मिश्रण है।

ثُمَّ إِنَّ مَرْجِعَهُمْ لَإِلَى ٱلْجَحِيمِ ٦٨

फिर निःसंदेह उनकी वापसी निश्चय उसी भड़कती हुई आग की ओर होगी।

إِنَّهُمْ أَلْفَوْا۟ ءَابَآءَهُمْ ضَآلِّينَ ٦٩

निःसंदेह उन्होंने अपने बाप-दादा को गुमराह पाया।

فَهُمْ عَلَىٰٓ ءَاثَٰرِهِمْ يُهْرَعُونَ ٧٠

तो वे उन्हीं के पदचिह्नों पर दौड़े चले जा रहे हैं।[11]

टिप्पणियाँ

[11] इसमें नरक में जाने का जो सबसे बड़ा कारण बताया गया है, वह है नबी को न मानना और अपने पूर्वजों के पंथ पर ही चलते रहना।

وَلَقَدْ ضَلَّ قَبْلَهُمْ أَكْثَرُ ٱلْأَوَّلِينَ ٧١

और निःसंदेह इनसे पहले अगले लोगों में से अधिकतर लोग गुमराह हो चुके हैं।

وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا فِيهِم مُّنذِرِينَ ٧٢

तथा निःसंदेह हमने उनके अंदर कई डराने वाले भेजे।

فَٱنظُرْ كَيْفَ كَانَ عَٰقِبَةُ ٱلْمُنذَرِينَ ٧٣

तो देखो कि उन डराए जाने वालों का परिणाम[12] कैसा हुआ?

टिप्पणियाँ

[12] अतः उनके दुष्परिणाम से शिक्षा ग्रहण करना चाहिए।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ٧٤

सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।

وَلَقَدْ نَادَىٰنَا نُوحٌ فَلَنِعْمَ ٱلْمُجِيبُونَ ٧٥

तथा निःसंदेह नूह ने हमें पुकारा, तो निश्चय हम अच्छे स्वीकार करने वाले हैं।

وَنَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥ مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ٧٦

और हमने उसे और उसके घर वालों को बहुत बड़ी आपदा से बचा लिया।

وَجَعَلْنَا ذُرِّيَّتَهُۥ هُمُ ٱلْبَاقِينَ ٧٧

तथा हमने उसकी संतति ही को बाक़ी रहने वाला[13] बना दिया।

टिप्पणियाँ

[13] उसकी जाति के जलमग्न हो जाने के पश्चात्।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ٧٨

और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

سَلَٰمٌ عَلَىٰ نُوحٍ فِى ٱلْعَٰلَمِينَ ٧٩

सर्व संसार में नूह़ पर सलाम[14] हो।

टिप्पणियाँ

[14] अर्थात उसकी बुरी चर्चा से सुरक्षा।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ٨٠

निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ٨١

निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

ثُمَّ أَغْرَقْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ٨٢

फिर हमने दूसरों को डुबो दिया।

وَإِنَّ مِن شِيعَتِهِۦ لَإِبْرَٰهِيمَ ٨٣

और निःसंदेह उसी के तरीक़े पर चलने वालों में से निश्चय इबराहीम (भी) थे।

إِذْ جَآءَ رَبَّهُۥ بِقَلْبٍ سَلِيمٍ ٨٤

(उस समय को याद करें) जब वह अपने पालनहार के पास शुद्ध दिल लेकर आए।

إِذْ قَالَ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِۦ مَاذَا تَعْبُدُونَ ٨٥

जब उसने अपने बाप तथा अपनी जाति से कहा : तुम किस चीज़ की इबादत करते हो?

أَئِفْكًا ءَالِهَةً دُونَ ٱللَّهِ تُرِيدُونَ ٨٦

क्या अल्लाह को छोड़कर अपने गढ़े हुए पूज्यों को चाहते हो?

فَمَا ظَنُّكُم بِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ ٨٧

तो सर्व संसार के पालनहार के विषय में तुम्हारा क्या गुमान है?

فَنَظَرَ نَظْرَةً فِى ٱلنُّجُومِ ٨٨

फिर उसने एक दृष्टि तारों पर डाली।[15]

टिप्पणियाँ

[15] यह सोचते हुए कि इनके उत्सव में न जाने के लिए क्या बहाना करूँ।

فَقَالَ إِنِّى سَقِيمٌ ٨٩

फिर कहा : मैं तो बीमार हूँ।

فَتَوَلَّوْا۟ عَنْهُ مُدْبِرِينَ ٩٠

तो वे उससे पीठ फेरकर वापस चले गए।

فَرَاغَ إِلَىٰٓ ءَالِهَتِهِمْ فَقَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ ٩١

फिर वह चुपके से उनके पूज्यों की ओर गया और कहा : क्या तुम खाते नहीं?

مَا لَكُمْ لَا تَنطِقُونَ ٩٢

तुम्हें क्या हुआ कि तुम बोलते नहीं?

فَرَاغَ عَلَيْهِمْ ضَرْبًۢا بِٱلْيَمِينِ ٩٣

फिर वह दाएँ हाथ से मारते हुए उनपर पिल पड़ा।

فَأَقْبَلُوٓا۟ إِلَيْهِ يَزِفُّونَ ٩٤

फिर वे दौड़ते हुए उसकी ओर आए।

قَالَ أَتَعْبُدُونَ مَا تَنْحِتُونَ ٩٥

उसने कहा : क्या तुम उसकी इबादत करते हो, जिसे ख़ुद तराशते हो?

وَٱللَّهُ خَلَقَكُمْ وَمَا تَعْمَلُونَ ٩٦

हालाँकि अल्लाह ही ने तुम्हें पैदा किया तथा उसे भी जो तुम करते हो।

قَالُوا۟ ٱبْنُوا۟ لَهُۥ بُنْيَٰنًا فَأَلْقُوهُ فِى ٱلْجَحِيمِ ٩٧

उन्होंने कहा : इसके लिए एक इमारत (अग्नि-कुंड) बनाओ, फिर इसे भड़कती आग में फेंक दो।

فَأَرَادُوا۟ بِهِۦ كَيْدًا فَجَعَلْنَٰهُمُ ٱلْأَسْفَلِينَ ٩٨

अतः उन्होंने उसके साथ एक चाल चलनी चाही, तो हमने उन्हीं को सबसे नीचा कर दिया।

وَقَالَ إِنِّى ذَاهِبٌ إِلَىٰ رَبِّى سَيَهْدِينِ ٩٩

तथा उसने कहा : निःसंदेह मैं अपने पालनहार की ओर[16] जाने वाला हूँ। वह मुझे अवश्य सीधा रास्ता दिखाएगा।

टिप्पणियाँ

[16] अर्थात ऐसे स्थान की ओर जहाँ अपने पालनहार की इबादत कर सकूँ।

رَبِّ هَبْ لِى مِنَ ٱلصَّٰلِحِينَ ١٠٠

ऐ मेरे पालनहार! मुझे एक सदाचारी पुत्र प्रदान कर।

فَبَشَّرْنَٰهُ بِغُلَٰمٍ حَلِيمٍ ١٠١

तो हमने उसे एक सहनशील पुत्र की शुभ सूचना दी।

فَلَمَّا بَلَغَ مَعَهُ ٱلسَّعْىَ قَالَ يَٰبُنَىَّ إِنِّىٓ أَرَىٰ فِى ٱلْمَنَامِ أَنِّىٓ أَذْبَحُكَ فَٱنظُرْ مَاذَا تَرَىٰ قَالَ يَٰٓأَبَتِ ٱفْعَلْ مَا تُؤْمَرُ سَتَجِدُنِىٓ إِن شَآءَ ٱللَّهُ مِنَ ٱلصَّٰبِرِينَ ١٠٢

फिर जब वह उसके साथ दौड़-धूप की आयु को पहुँचा, तो उसने कहा : ऐ मेरे प्रिय बेटे! निःसंदेह मैं स्वप्न में देखता हूँ कि मैं तुझे ज़बह कर रहा हूँ। तो अब देख, तेरा क्या विचार है? उसने कहा : ऐ मेरे पिता! आपको जो आदेश दिया जा रहा है उसे कर डालिए। अगर अल्लाह ने चाहा, तो आप अवश्य मुझे धैर्यवानों में से पाएँगे।

فَلَمَّآ أَسْلَمَا وَتَلَّهُۥ لِلْجَبِينِ ١٠٣

अंततः जब दोनों (अल्लाह के आदेश के प्रति) समर्पित हो गए, और उसने उसे पेशानी के एक किनारे पर गिरा दिया।

وَنَٰدَيْنَٰهُ أَن يَٰٓإِبْرَٰهِيمُ ١٠٤

और हमने उसे आवाज़ दी कि ऐ इबराहीम!

قَدْ صَدَّقْتَ ٱلرُّءْيَآ إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١٠٥

निश्चय तूने स्वप्न को सच कर दिखाया। हम सदाचारियों को इसी तरह बदला प्रदान करते हैं।

إِنَّ هَٰذَا لَهُوَ ٱلْبَلَٰٓؤُا۟ ٱلْمُبِينُ ١٠٦

निःसंदेह यही तो निश्चय खुला परीक्षण है।

وَفَدَيْنَٰهُ بِذِبْحٍ عَظِيمٍ ١٠٧

और हमने उसके फ़िदया (छुड़ौती) में एक बहुत बड़ा ज़बीहा[17] दिया।

टिप्पणियाँ

[17] यह महान ज़बीहा एक मेंढा था। जिसे जिबरील (अलैहिस्सलाम) द्वारा स्वर्ग से भेजा गया। जो आपके प्रिय पुत्र इसमाईल (अलैहिस्सलाम) के स्थान पर ज़बह किया गया। फिर इस विधि को प्रलय तक के लिए अल्लाह के सामीप्य का एक साधन तथा ईदुल अज़हा (बक़रईद) का प्रियवर कर्म बना दिया गया। जिसे संसार के सभी मुसलमान ईदुल अज़हा में करते हैं।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ١٠٨

और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِبْرَٰهِيمَ ١٠٩

सलाम हो इबराहीम पर।

كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١١٠

हम इसी तरह सदाचारियों को बदला प्रदान करते हैं।

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ١١١

निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

وَبَشَّرْنَٰهُ بِإِسْحَٰقَ نَبِيًّا مِّنَ ٱلصَّٰلِحِينَ ١١٢

तथा हमने उसे इसहाक़ की शुभ सूचना दी, जो नबी होगा, सदाचारियों में से (होगा)।[18]

टिप्पणियाँ

[18] इस आयत से विदित होता है कि इबराहीम (अलैहिस्सलाम) को इस बलि के पश्चात् दूसरे पुत्र आदरणीय इसहाक़ की शुभ सूचना दी गई। इससे ज्ञात हुआ की बलि इसमाईल (अलैहिस्सलाम) की दी गई थी। और दोनों की आयु में लग-भग चौदह वर्ष का अंतर है।

وَبَٰرَكْنَا عَلَيْهِ وَعَلَىٰٓ إِسْحَٰقَ وَمِن ذُرِّيَّتِهِمَا مُحْسِنٌ وَظَالِمٌ لِّنَفْسِهِۦ مُبِينٌ ١١٣

तथा हमने उसपर और इसहाक़ पर बरकत उतारी। और उन दोनों की संतति में से कोई सदाचारी है और कोई अपने आप पर खुला अत्याचार करने वाला है।

وَلَقَدْ مَنَنَّا عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ ١١٤

तथा निःसंदेह हमने मूसा और हारून पर उपकार किया।

وَنَجَّيْنَٰهُمَا وَقَوْمَهُمَا مِنَ ٱلْكَرْبِ ٱلْعَظِيمِ ١١٥

और हमने उन दोनों को और उन दोनों की जाति को बहुत बड़ी विपत्ति से छुटकारा दिया।

وَنَصَرْنَٰهُمْ فَكَانُوا۟ هُمُ ٱلْغَٰلِبِينَ ١١٦

तथा हमने उनकी सहायता की, तो वही प्रभुत्वशाली रहे।

وَءَاتَيْنَٰهُمَا ٱلْكِتَٰبَ ٱلْمُسْتَبِينَ ١١٧

तथा हमने उन दोनों को अत्यंत स्पष्ट पुस्तक (तौरात) प्रदान की।

وَهَدَيْنَٰهُمَا ٱلصِّرَٰطَ ٱلْمُسْتَقِيمَ ١١٨

और हमने उन दोनों को सीधे मार्ग पर चलाया।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِمَا فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ١١٩

और हमने पीछे आने वालों में उन दोनों का अच्छा स्मरण छोड़ा।

سَلَٰمٌ عَلَىٰ مُوسَىٰ وَهَٰرُونَ ١٢٠

सलाम हो मूसा और हारून पर।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١٢١

निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

إِنَّهُمَا مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ١٢٢

निःसंदेह वे दोनों हमारे ईमान वाले बंदों में से थे।

وَإِنَّ إِلْيَاسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ١٢٣

तथा निःसंदेह इलयास निश्चय नबियों में से थे।

إِذْ قَالَ لِقَوْمِهِۦٓ أَلَا تَتَّقُونَ ١٢٤

जब उसने अपनी जाति से कहा : क्या तुम डरते नहीं?

أَتَدْعُونَ بَعْلًا وَتَذَرُونَ أَحْسَنَ ٱلْخَٰلِقِينَ ١٢٥

क्या तुम 'बअ्ल' (नामक मूर्ति) को पुकारते हो? तथा पैदा करने वालों में सबस बेहतर को छोड़ देते हो?

ٱللَّهَ رَبَّكُمْ وَرَبَّ ءَابَآئِكُمُ ٱلْأَوَّلِينَ ١٢٦

अल्लाह को, जो तुम्हारा पालनहार है तथा तुम्हारे पहले बाप-दादा का पालनहार है।

فَكَذَّبُوهُ فَإِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ١٢٧

किंतु उन्होंने उसे झुठला दिया। तो निश्चय वे अवश्य हाज़िर किए जाने वाले हैं।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ١٢٨

सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।

وَتَرَكْنَا عَلَيْهِ فِى ٱلْـَٔاخِرِينَ ١٢٩

और हमने पीछे आने वालों में उसके लिए (अच्छा स्मरण) बाक़ी रखा।

سَلَٰمٌ عَلَىٰٓ إِلْ يَاسِينَ ١٣٠

सलाम हो इल्यासीन[19] पर।

टिप्पणियाँ

[19] इल्यासीन इलयास ही का एक उच्चारण है। उन्हें अन्य धर्म ग्रंथों में इलया भी कहा गया है।

إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِى ٱلْمُحْسِنِينَ ١٣١

निःसंदेह हम सदाचारियों को इसी तरह बदला देते हैं।

إِنَّهُۥ مِنْ عِبَادِنَا ٱلْمُؤْمِنِينَ ١٣٢

निश्चय वह हमारे ईमान वाले बंदों में से था।

وَإِنَّ لُوطًا لَّمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ١٣٣

और निःसंदेह लूत निश्चय रसूलों में से था।

إِذْ نَجَّيْنَٰهُ وَأَهْلَهُۥٓ أَجْمَعِينَ ١٣٤

जब हमने उसे तथा उसके सब घर वालों को बचाया।

إِلَّا عَجُوزًا فِى ٱلْغَٰبِرِينَ ١٣٥

सिवाय एक बुढ़िया[20] के, जो पीछे रह जाने वालों में से थी।

टिप्पणियाँ

[20] यह लूत (अलैहिस्सलाम) की काफ़िर पत्नी थी।

ثُمَّ دَمَّرْنَا ٱلْـَٔاخَرِينَ ١٣٦

फिर हमने दूसरों का विनाश कर दिया।

وَإِنَّكُمْ لَتَمُرُّونَ عَلَيْهِم مُّصْبِحِينَ ١٣٧

तथा निःसंदेह तुम[21] निश्चय सुबह के समय जाते हुए उनपर से गुज़रते हो।

टिप्पणियाँ

[21] मक्का वासियों को संबोधित किया गया है।

وَبِٱلَّيْلِ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ١٣٨

तथा रात के समय भी। तो क्या तुम समझते नहीं?

وَإِنَّ يُونُسَ لَمِنَ ٱلْمُرْسَلِينَ ١٣٩

तथा निःसंदेह यूनुस निश्चय रसूलों में से था।

إِذْ أَبَقَ إِلَى ٱلْفُلْكِ ٱلْمَشْحُونِ ١٤٠

जब वह भरी नाव की ओर भागकर गया।[22]

टिप्पणियाँ

[22] अल्लाह की अनुमति के बिना अपने नगर से नगर वासियों को यातना के आने की सूचना देकर निकल गए। और नाव पर सवार हो गए। नाव सागर की लहरों में घिर गई। इसलिए बोझ कम करने के लिए नाम निकाला गया, तो यूनुस अलैहिस्सलाम का नाम निकला और उन्हें समुद्र में फेंक दिया गया।

فَسَاهَمَ فَكَانَ مِنَ ٱلْمُدْحَضِينَ ١٤١

फिर वह क़ुर'आ में शामिल हुआ, तो हारने वालों में से हो गया।

فَٱلْتَقَمَهُ ٱلْحُوتُ وَهُوَ مُلِيمٌ ١٤٢

फिर मछली ने उसे निगल लिया, इस हाल में कि वह निंदनीय था।

فَلَوْلَآ أَنَّهُۥ كَانَ مِنَ ٱلْمُسَبِّحِينَ ١٤٣

फिर अगर यह बात न होती कि वह अल्लाह की पवित्रता का वर्णन करने वालों में से था।

لَلَبِثَ فِى بَطْنِهِۦٓ إِلَىٰ يَوْمِ يُبْعَثُونَ ١٤٤

तो निश्चय वह उसके पेट में उस दिन तक रहता, जिसमें लोग उठाए जाएँगे।[23]

टिप्पणियाँ

[23] अर्थात प्रयल के दिन तक। (देखिए : सूरतुल-अंबिया, आयत : 87)

فَنَبَذْنَٰهُ بِٱلْعَرَآءِ وَهُوَ سَقِيمٌ ١٤٥

फिर हमने उसे चटियल मैदान में फेंक दिया, इस हाल में कि वह बीमार[24] था।

टिप्पणियाँ

[24] अर्थात निर्बल नवजात शिशु के समान।

وَأَنۢبَتْنَا عَلَيْهِ شَجَرَةً مِّن يَقْطِينٍ ١٤٦

तथा हमने उसपर एक लता वाला वृक्ष उगा दिया।[25]

टिप्पणियाँ

[25] रक्षा के लिए।

وَأَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ مِا۟ئَةِ أَلْفٍ أَوْ يَزِيدُونَ ١٤٧

तथा हमने उसे एक लाख की ओर भेजा, बल्कि वे अधिक होंगे।

فَـَٔامَنُوا۟ فَمَتَّعْنَٰهُمْ إِلَىٰ حِينٍ ١٤٨

चुनाँचे वे ईमान ले आए, तो हमने उन्हें एक समय तक लाभ उठाने दिया।[26]

टिप्पणियाँ

[26] देखिए : सूरत यूनुस।

فَٱسْتَفْتِهِمْ أَلِرَبِّكَ ٱلْبَنَاتُ وَلَهُمُ ٱلْبَنُونَ ١٤٩

तो (ऐ नबी!) आप उनसे पूछें कि क्या आपके पालनहार के लिए बेटियाँ हैं और उनके लिए बेटे?

أَمْ خَلَقْنَا ٱلْمَلَٰٓئِكَةَ إِنَٰثًا وَهُمْ شَٰهِدُونَ ١٥٠

या हमने फ़रिश्तों को मादा पैदा किया, जबकि वे उस समय उपस्थित[27] थे?

टिप्पणियाँ

[27] इसमें मक्का के मिश्रणवादियों का खंडन किया जा रहा है, जो फ़रिश्तों को अल्लाह की पुत्रियाँ कहते थे। जबकि वे स्वयं पुत्रियों के जन्म को अप्रिय मानते थे।

أَلَآ إِنَّهُم مِّنْ إِفْكِهِمْ لَيَقُولُونَ ١٥١

सुन लो! निःसंदेह वे निश्चय अपने झूठ ही से कहते हैं।

وَلَدَ ٱللَّهُ وَإِنَّهُمْ لَكَٰذِبُونَ ١٥٢

कि अल्लाह ने संतान बनाया है। और निःसंदेह वे निश्चय झूठे हैं।

أَصْطَفَى ٱلْبَنَاتِ عَلَى ٱلْبَنِينَ ١٥٣

क्या उसने पुत्रियों को पुत्रों पर प्राथमिकता दी?

مَا لَكُمْ كَيْفَ تَحْكُمُونَ ١٥٤

तुम्हें क्या हो गया है, तुम कैसा फ़ैसला कर रहे हो?

أَفَلَا تَذَكَّرُونَ ١٥٥

तो क्या तुम शिक्षा ग्रहण नहीं करते?

أَمْ لَكُمْ سُلْطَٰنٌ مُّبِينٌ ١٥٦

या तुम्हारे पास कोई स्पष्ट प्रमाण है?

فَأْتُوا۟ بِكِتَٰبِكُمْ إِن كُنتُمْ صَٰدِقِينَ ١٥٧

तो लाओ अपनी किताब, यदि तुम सच्चे हो?

وَجَعَلُوا۟ بَيْنَهُۥ وَبَيْنَ ٱلْجِنَّةِ نَسَبًا وَلَقَدْ عَلِمَتِ ٱلْجِنَّةُ إِنَّهُمْ لَمُحْضَرُونَ ١٥٨

और उन्होंने अल्लाह तथा जिन्नों के बीच रिश्तेदारी बना दी। हालाँकि निःसंदेह जिन्न जान चुके हैं कि निःसंदेह वे (मुश्रिक) अवश्य उपस्थित किए जाने वाले हैं।[28]

टिप्पणियाँ

[28] अर्थात यातना के लिए। तो यदि वे उसके संबंधी होते, तो उन्हें यातना क्यों देता?

سُبْحَٰنَ ٱللَّهِ عَمَّا يَصِفُونَ ١٥٩

अल्लाह उन बातों से पवित्र है, जो वे वर्णन करते हैं।

إِلَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ١٦٠

सिवाय अल्लाह के ख़ालिस किए हुए बंदों के।[29]

टिप्पणियाँ

[29] वे अल्लाह को ऐसे दुर्गुणों से युक्त नहीं करते।

فَإِنَّكُمْ وَمَا تَعْبُدُونَ ١٦١

अतः निःसंदेह तुम तथा जिनकी तुम पूजा करते हो।

مَآ أَنتُمْ عَلَيْهِ بِفَٰتِنِينَ ١٦٢

तुम उसके विरुद्ध (किसी को) बहकाने वाले नहीं।

إِلَّا مَنْ هُوَ صَالِ ٱلْجَحِيمِ ١٦٣

परंतु उसको, जो भड़कती आग में प्रवेश करने वाला है।

وَمَا مِنَّآ إِلَّا لَهُۥ مَقَامٌ مَّعْلُومٌ ١٦٤

और हम (फ़रिश्तों) में से जो भी है उसका एक नियत स्थान है।

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلصَّآفُّونَ ١٦٥

तथा निःसंदेह हम निश्चय पंक्तिबद्ध रहने वाले हैं।

وَإِنَّا لَنَحْنُ ٱلْمُسَبِّحُونَ ١٦٦

तथा निःसंदेह हम निश्चय तस्बीह़ (पवित्रता गान) करने वाले हैं।

وَإِن كَانُوا۟ لَيَقُولُونَ ١٦٧

तथा निःसंदेह वे (मुश्रिक) तो कहा करते थे

لَوْ أَنَّ عِندَنَا ذِكْرًا مِّنَ ٱلْأَوَّلِينَ ١٦٨

यदि हमारे पास पहले लोगों की कोई शिक्षा (किताब) होती,

لَكُنَّا عِبَادَ ٱللَّهِ ٱلْمُخْلَصِينَ ١٦٩

तो हम अवश्य अल्लाह के ख़ालिस (चुने हुए) बंदे होते।

فَكَفَرُوا۟ بِهِۦ فَسَوْفَ يَعْلَمُونَ ١٧٠

(फिर जब किताब आ गई) तो उन्होंने उसका इनकार कर दिया। अतः जल्द ही उन्हें पता चल जाएगा।

وَلَقَدْ سَبَقَتْ كَلِمَتُنَا لِعِبَادِنَا ٱلْمُرْسَلِينَ ١٧١

और निःसंदेह हमारे भेजे हुए बंदों के लिए हमारी बात पहले ही निश्चित हो चुकी

إِنَّهُمْ لَهُمُ ٱلْمَنصُورُونَ ١٧٢

कि निःसंदेह वही हैं, जिनकी सहायता की जाएगी।

وَإِنَّ جُندَنَا لَهُمُ ٱلْغَٰلِبُونَ ١٧٣

तथा निःसंदेह हमारी सेना ही निश्चय प्रभुत्वशाली रहेगी।

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ ١٧٤

तो आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।

وَأَبْصِرْهُمْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ١٧٥

तथा उन्हें देखते रहें। वे भी शीघ्र ही देख लेंगे।

أَفَبِعَذَابِنَا يَسْتَعْجِلُونَ ١٧٦

तो क्या वे हमारी यातना की शीघ्र माँग कर रहे हैं?

فَإِذَا نَزَلَ بِسَاحَتِهِمْ فَسَآءَ صَبَاحُ ٱلْمُنذَرِينَ ١٧٧

फिर जब वह उनके आँगन में उतरेगी, तो डराए गए लोगों की सुबह बहुत बुरी होगी।

وَتَوَلَّ عَنْهُمْ حَتَّىٰ حِينٍ ١٧٨

َऔर आप कुछ समय तक के लिए उनसे मुँह फेर लें।

وَأَبْصِرْ فَسَوْفَ يُبْصِرُونَ ١٧٩

तथा देखते रहें। जल्द ही वे भी देख लेंगे।

سُبْحَٰنَ رَبِّكَ رَبِّ ٱلْعِزَّةِ عَمَّا يَصِفُونَ ١٨٠

पवित्र है आपका पालनहार, पराक्रम व शक्ति का स्वामी!, उस बात से, जो वे बयान करते हैं।

وَسَلَٰمٌ عَلَى ٱلْمُرْسَلِينَ ١٨١

तथा सलाम हो रसूलों पर।

وَٱلْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ ١٨٢

और हर प्रकार की प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सर्व संसार का पालनहार है।

ऑनलाइन क़ुरआन पढ़ने के बारे में सवाल

क्या सूरह As-Saffat मक्की है या मदनी?

इस रीडर के डेटा (Tanzil) में सूरह As-Saffat को मक्की माना गया है।

सूरह As-Saffat से पहले और बाद में कौन-सी सूरतें आती हैं?

यह Ya-Sin के बाद और Sad से पहले आती है।

क्या मैं सूरह As-Saffat अपनी भाषा में पढ़ सकता हूँ?

जी हाँ। पाठ के ऊपर से 81 भाषाओं के 130 अनुवादों में से कोई चुनें, या सिर्फ़ अरबी पाठ पढ़ें।

क्या मैं सूरह As-Saffat सुन सकता हूँ?

जी हाँ। आयत-दर-आयत सुनने के लिए «सूरह सुनें» दबाएँ, या किसी आयत के पास प्ले बटन। 50 क़ारियों में से किसी एक को चुनें; रिकॉर्डिंग EveryAyah.com से तभी स्ट्रीम होती है जब आप प्ले दबाते हैं।

अरबी पाठ: Tanzil Project (tanzil.net), ज्यों का त्यों। अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari (QuranEnc.com, version 1.1.5), बिना किसी बदलाव के। डेटा: quran-json (CC BY-SA 4.0). तिलावतें: EveryAyah.com (सिर्फ़ तब स्ट्रीम होती हैं जब आप प्ले दबाते हैं)। स्रोत और लाइसेंस