सूरह Al-Mutaffifin المطففين

36 आयतें · मक्की

सूरह Al-Mutaffifin में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-Mutaffifin क़ुरआन की 114 सूरतों में 83वीं सूरह है और इसमें 36 आयतें हैं। इसे मक्की माना जाता है।

सूरह का क्रम
83 / 114
आयतें
36
वर्गीकरण
मक्की

29 अक्टूबर 2026 को अपडेट किया. Tanzil Project (tanzil.net), quran-json.

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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَيْلٌ لِّلْمُطَفِّفِينَ ١

विनाश है नाप-तौल में कमी करने वालों के लिए।

ٱلَّذِينَ إِذَا ٱكْتَالُوا۟ عَلَى ٱلنَّاسِ يَسْتَوْفُونَ ٢

वे लोग कि जब लोगों से नापकर लेते हैं, तो पूरा लेते हैं।

وَإِذَا كَالُوهُمْ أَو وَّزَنُوهُمْ يُخْسِرُونَ ٣

और जब उन्हें नापकर या तौलकर देते हैं, तो कम देते हैं।

أَلَا يَظُنُّ أُو۟لَٰٓئِكَ أَنَّهُم مَّبْعُوثُونَ ٤

क्या वे लोग विश्वास नहीं रखते कि वे (मरने के बाद) उठाए जाने वाले हैं?

لِيَوْمٍ عَظِيمٍ ٥

एक बहुत बड़े दिन के लिए।

يَوْمَ يَقُومُ ٱلنَّاسُ لِرَبِّ ٱلْعَٰلَمِينَ ٦

जिस दिन लोग सर्व संसार के पालनहार के सामने खड़े होंगे।[1]

टिप्पणियाँ

[1] (1-6) इस सूरत की प्रथम छह आयतों में इसी व्यवसायिक विश्वास घात पर पकड़ की गई है कि न्याय तो यह है कि अपने लिए अन्याय नहीं चाहते, तो दूसरों के साथ न्याय करो। और इस रोग का निवारण अल्लाह के भय तथा परलोक पर विश्वास ही से हो सकता है। क्योंकि इस स्थिति में अमानतदारी एक नीति ही नहीं, बल्कि धार्मिक कर्तव्य होगा औ इस पर स्थित रहना लाभ तथा हानि पर निर्भर नहीं रहेगा।

كَلَّآ إِنَّ كِتَٰبَ ٱلْفُجَّارِ لَفِى سِجِّينٍ ٧

हरगिज़ नहीं, निःसंदेह दुराचारियों का कर्म-पत्र "सिज्जीन" में है।

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا سِجِّينٌ ٨

और तुम क्या जानो कि 'सिज्जीन' क्या है?

كِتَٰبٌ مَّرْقُومٌ ٩

वह एक लिखित पुस्तक है।

وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ١٠

उस दिन झुठलाने वालों के लिए विनाश है।

ٱلَّذِينَ يُكَذِّبُونَ بِيَوْمِ ٱلدِّينِ ١١

जो बदले के दिन को झुठलाते हैं।

وَمَا يُكَذِّبُ بِهِۦٓ إِلَّا كُلُّ مُعْتَدٍ أَثِيمٍ ١٢

तथा उसे केवल वही झुठलाता है, जो सीमा का उल्लंघन करने वाला, बड़ा पापी है।

إِذَا تُتْلَىٰ عَلَيْهِ ءَايَٰتُنَا قَالَ أَسَٰطِيرُ ٱلْأَوَّلِينَ ١٣

जब उसके सामने हमारी आयतों को पढ़ा जाता है, तो कहता है : यह पहले लोगों की कहानियाँ हैं।

كَلَّا بَلْ رَانَ عَلَىٰ قُلُوبِهِم مَّا كَانُوا۟ يَكْسِبُونَ ١٤

हरगिज़ नहीं, बल्कि जो कुछ वे कमाते थे, वह ज़ंग बनकर उनके दिलों पर छा गया है।

كَلَّآ إِنَّهُمْ عَن رَّبِّهِمْ يَوْمَئِذٍ لَّمَحْجُوبُونَ ١٥

हरगिज़ नहीं, निश्चय वे उस दिन अपने पालनहार (के दर्शन) से रोक दिए जाएँगे।

ثُمَّ إِنَّهُمْ لَصَالُوا۟ ٱلْجَحِيمِ ١٦

फिर निःसंदेह वे अवश्य जहन्नम में प्रवेश करने वाले हैं।

ثُمَّ يُقَالُ هَٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ ١٧

फिर कहा जाएगा : यही है, जिसे तुम झुठलाया करते थे।[2]

टिप्पणियाँ

[2] (7-17) इन आयतों में कुकर्मियों के दुष्परिणाम का विवरण दिया गया है। तथा यह बताया गया है कि उनके कुकर्म पहले ही से अपराध पत्रों में अंकित किए जा रहे हैं। तथा वे परलोक में कड़ी यातना का सामना करेंगे। और नरक में झोंक दिए जाएँगे। "सिज्जीन" से अभिप्राय, एक जगह है जहाँ पर काफ़िरों, अत्याचारियों और मुश्रिकों के कुकर्म पत्र तथा प्राण एकत्र किए जाते हैं। दिलों का लोहमल, पापों की कालिमा को कहा गया है। पाप अंतरात्मा को अंधकार बना देते हैं, तो सत्य को स्वीकार करने की स्वभाविक योग्यता खो देते हैं।

كَلَّآ إِنَّ كِتَٰبَ ٱلْأَبْرَارِ لَفِى عِلِّيِّينَ ١٨

हरगिज़ नहीं, निःसंदेह नेक लोगों का कर्म-पत्र निश्चय "इल्लिय्यीन" में है।

وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا عِلِّيُّونَ ١٩

और तुम क्या जानो कि 'इल्लिय्यीन' क्या है?

كِتَٰبٌ مَّرْقُومٌ ٢٠

वह एक लिखित पुस्तक है।

يَشْهَدُهُ ٱلْمُقَرَّبُونَ ٢١

जिसके पास समीपवर्ती (फरिश्ते) उपस्थित रहते हैं।

إِنَّ ٱلْأَبْرَارَ لَفِى نَعِيمٍ ٢٢

निःसंदेह नेक लोग बड़ी नेमत (आनंद) में होंगे।

عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ٢٣

तख़्तों पर (बैठे) देख रहे होंगे।

تَعْرِفُ فِى وُجُوهِهِمْ نَضْرَةَ ٱلنَّعِيمِ ٢٤

तुम उनके चेहरों पर नेमत की ताज़गी का आभास करोगे।

يُسْقَوْنَ مِن رَّحِيقٍ مَّخْتُومٍ ٢٥

उन्हें मुहर लगी शुद्ध शराब पिलाई जाएगी।

خِتَٰمُهُۥ مِسْكٌ وَفِى ذَٰلِكَ فَلْيَتَنَافَسِ ٱلْمُتَنَٰفِسُونَ ٢٦

उसकी मुहर कस्तूरी की होगी। अतः प्रतिस्पर्धा करने वालों को इसी (की प्राप्ति) के लिए प्रतिस्पर्धा करना चाहिए।

وَمِزَاجُهُۥ مِن تَسْنِيمٍ ٢٧

उसमें 'तसनीम' की मिलावट होगी।

عَيْنًا يَشْرَبُ بِهَا ٱلْمُقَرَّبُونَ ٢٨

वह एक स्रोत है, जिससे समीपवर्ती लोग पिएँगे।[3]

टिप्पणियाँ

[3] (18-28) इन आयतों में बताया गया है कि सदाचारियों के कर्म ऊँचे पत्रों में अंकित किए जा रहे हैं जो फ़रिश्तों के पास सुरक्षित हैं। और वे स्वर्ग में सुख के साथ रहेंगे। "इल्लिय्यीन" से अभिप्राय, जन्नत में एक जगह है। जहाँ पर नेक लोगों के कर्म पत्र तथा प्राण एकत्र किए जाते हैं। वहाँ पर समीपवर्ती फ़रिश्ते उपस्थित रहते हैं।

إِنَّ ٱلَّذِينَ أَجْرَمُوا۟ كَانُوا۟ مِنَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ يَضْحَكُونَ ٢٩

निःसंदेह जो लोग अपराधी हैं, वे (दुनिया में) ईमान लाने वालों पर हँसा करते थे।

وَإِذَا مَرُّوا۟ بِهِمْ يَتَغَامَزُونَ ٣٠

और जब वे उनके पास से गुज़रते, तो आपस में आँखों से इशारे किया करते थे।

وَإِذَا ٱنقَلَبُوٓا۟ إِلَىٰٓ أَهْلِهِمُ ٱنقَلَبُوا۟ فَكِهِينَ ٣١

और जब अपने घर वालों की ओर लौटते, तो (मोमिनों के परिहास का) आनंद लेते हुए लौटते थे।

وَإِذَا رَأَوْهُمْ قَالُوٓا۟ إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ لَضَآلُّونَ ٣٢

और जब वे उन (मोमिनों) को देखते, तो कहते थे : निःसंदेह ये लोग निश्चय भटके हुए हैं।

وَمَآ أُرْسِلُوا۟ عَلَيْهِمْ حَٰفِظِينَ ٣٣

हालाँकि वे उनपर निरीक्षक बनाकर नहीं भेजे गए थे।

فَٱلْيَوْمَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُوا۟ مِنَ ٱلْكُفَّارِ يَضْحَكُونَ ٣٤

तो आज वे लोग जो ईमान लाए, काफ़िरों पर हँस रहे हैं।

عَلَى ٱلْأَرَآئِكِ يَنظُرُونَ ٣٥

तख़्तों पर बैठे देख रहे हैं।

هَلْ ثُوِّبَ ٱلْكُفَّارُ مَا كَانُوا۟ يَفْعَلُونَ ٣٦

क्या काफ़िरों को उसका बदला मिल गया, जो वे किया करते थे?[4]

टिप्पणियाँ

[4] (29-36) इन आयतों में बताया गया है कि परलोक में कर्मों का फल दिया जाएगा, तो सांसारिक परिस्थितियाँ बदल जाएँगी। संसार में तो सब के लिए अल्लाह की दया है, परंतु न्याय के दिन जो अपने सुख सुविधा पर गर्व करते थे और जिन निर्धन मुसलमानों को देखकर आँखें मारते थे, वहाँ पर वही उनके दुष्परिणाम को देख कर प्रसन्न होंगे। अंतिम आयत में विश्वासहीनों के दुष्परिणाम को उनका कर्म कहा गया है। जिसमें यह संकेत है कि अच्छा फल और कुफल स्वयं इमसान के अपने कर्मों का स्वभाविक प्रभाव होगा।

ऑनलाइन क़ुरआन पढ़ने के बारे में सवाल

क्या सूरह Al-Mutaffifin मक्की है या मदनी?

इस रीडर के डेटा (Tanzil) में सूरह Al-Mutaffifin को मक्की माना गया है।

सूरह Al-Mutaffifin से पहले और बाद में कौन-सी सूरतें आती हैं?

यह Al-Infitar के बाद और Al-Inshiqaq से पहले आती है।

क्या मैं सूरह Al-Mutaffifin अपनी भाषा में पढ़ सकता हूँ?

जी हाँ। पाठ के ऊपर से 81 भाषाओं के 130 अनुवादों में से कोई चुनें, या सिर्फ़ अरबी पाठ पढ़ें।

क्या मैं सूरह Al-Mutaffifin सुन सकता हूँ?

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अरबी पाठ: Tanzil Project (tanzil.net), ज्यों का त्यों। अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari (QuranEnc.com, version 1.1.5), बिना किसी बदलाव के। डेटा: quran-json (CC BY-SA 4.0). तिलावतें: EveryAyah.com (सिर्फ़ तब स्ट्रीम होती हैं जब आप प्ले दबाते हैं)। स्रोत और लाइसेंस