सूरह Al-A'la الأعلى

19 आयतें · मक्की

सूरह Al-A'la में कितनी आयतें हैं?

सूरह Al-A'la क़ुरआन की 114 सूरतों में 87वीं सूरह है और इसमें 19 आयतें हैं। इसे मक्की माना जाता है।

सूरह का क्रम
87 / 114
आयतें
19
वर्गीकरण
मक्की

29 अक्टूबर 2026 को अपडेट किया. Tanzil Project (tanzil.net), quran-json.

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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

سَبِّحِ ٱسْمَ رَبِّكَ ٱلْأَعْلَى ١

अपने सर्वोच्च पालनहार के नाम की पवित्रता का वर्णन करो।

ٱلَّذِى خَلَقَ فَسَوَّىٰ ٢

जिसने पैदा किया और ठीक-ठीक बनाया।

وَٱلَّذِى قَدَّرَ فَهَدَىٰ ٣

और जिसने (हर चीज़ को) अनुमानित किया, फिर मार्ग दिखाया।

وَٱلَّذِىٓ أَخْرَجَ ٱلْمَرْعَىٰ ٤

और जिसने चारा उगाया।[1]

टिप्पणियाँ

[1] (1-4) इन आयतों में जिस पालनहार ने अपने नाम की पवित्रता का वर्णन करने का आदेश दिया है उसका परिचय दिया गया है कि वह पालनहार है जिसने सभी को पैदा किया, फिर उनको संतुलित किया, और उनके लिए एक विशेष प्रकार का अनुमान बनाया जिसकी सीमा से नहीं निकल सकते, और उनके लिए उस कार्य को पूरा करने की राह दिखाई जिसके लिए उन्हें पैदा किया है।

فَجَعَلَهُۥ غُثَآءً أَحْوَىٰ ٥

फिर उसे (सुखाकर) काले रंग का कूड़ा बना दिया।[2]

टिप्पणियाँ

[2] (4-5) इन आयतों में बताया गया है कि प्रत्येक कार्य अनुक्रम से धीरे-धीरे होते हैं। धरती के पौधे धीरे-धीरे गुंजान और हरे-भरे होते हैं। ऐसे ही मानवीय योग्यताएँ भी धीरे-धीरे पूरी होती हैं।

سَنُقْرِئُكَ فَلَا تَنسَىٰٓ ٦

(ऐ नबी!) हम तुम्हें ऐसा पढ़ाएँगे कि तुम नहीं भूलोगे।

إِلَّا مَا شَآءَ ٱللَّهُ إِنَّهُۥ يَعْلَمُ ٱلْجَهْرَ وَمَا يَخْفَىٰ ٧

परन्तु जो अल्लाह चाहे। निश्चय ही वह खुली बात को जानता है और उस बात को भी जो छिपी हुई है।

وَنُيَسِّرُكَ لِلْيُسْرَىٰ ٨

और हम तुम्हारे लिए सरल मार्ग आसान कर देंगे।[3]

टिप्पणियाँ

[3] (6-8) इनमें नबी सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम को यह निर्देश दिया गया है कि इसकी चिंता न करें कि क़ुरआन मुझे कैसे याद होगा, इसे याद कराना हमारा काम है, और इसका सुरक्षित रहना हमारी दया से होगा। और यह उसकी दया और रक्षा है कि इस मानव संसार में किसी धार्मिक ग्रंथ के संबंध में यह दावा नहीं किया जा सकता कि वह सुरक्षित है, यह गौरव केवल क़ुरआन ही को प्राप्त है।

فَذَكِّرْ إِن نَّفَعَتِ ٱلذِّكْرَىٰ ٩

तो आप नसीहत करते रहें। अगर नसीहत करना लाभदायक हो।

سَيَذَّكَّرُ مَن يَخْشَىٰ ١٠

वह व्यक्ति उपदेश ग्रहण करेगा, जो डरता है।

وَيَتَجَنَّبُهَا ٱلْأَشْقَى ١١

और उससे दूर रहेगा, जो सबसे बड़ा अभागा है।

ٱلَّذِى يَصْلَى ٱلنَّارَ ٱلْكُبْرَىٰ ١٢

जो सबसे बड़ी आग में प्रवेश करेगा।

ثُمَّ لَا يَمُوتُ فِيهَا وَلَا يَحْيَىٰ ١٣

फिर वह उसमें न मरेगा, न जिएगा।[4]

टिप्पणियाँ

[4] (9-13) इनमें बताया गया है कि आपको मात्र इसका प्रचार-प्रसार करना है। और इसकी सरल राह यह है कि जो सुने और मानने के लिए तैयार हो, उसे शिक्षा दी जाए। किसी के पीछे पड़ने की आवश्यकता नहीं है। जो हत्भागे हैं, वही नहीं सुनेंगे और नरक की यातना के रूप में अपना दुष्परिणाम देखेंगे।

قَدْ أَفْلَحَ مَن تَزَكَّىٰ ١٤

निश्चय वह सफल हो गया, जो पाक हो गया।

وَذَكَرَ ٱسْمَ رَبِّهِۦ فَصَلَّىٰ ١٥

तथा अपने पालनहार के नाम को याद किया और नमाज़ पढ़ी।[5]

टिप्पणियाँ

[5] (14-15) इन आयतों में कहा गया है कि सफलता मात्र उनके लिए है, जो आस्था, स्वभाव तथा कर्म की पवित्रता को अपनाएँ, और नमाज़ अदा करते रहें।

بَلْ تُؤْثِرُونَ ٱلْحَيَوٰةَ ٱلدُّنْيَا ١٦

बल्कि तुम सांसारिक जीवन को प्राथमिकता देते हो।

وَٱلْـَٔاخِرَةُ خَيْرٌ وَأَبْقَىٰٓ ١٧

हालाँकि आख़िरत बहुत उत्तम और अधिक बाक़ी रहने वाली है।

إِنَّ هَٰذَا لَفِى ٱلصُّحُفِ ٱلْأُولَىٰ ١٨

निःसंदेह यह बात पहले सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में है।

صُحُفِ إِبْرَٰهِيمَ وَمُوسَىٰ ١٩

इबराहीम तथा मूसा के सह़ीफ़ों (ग्रंथों) में।[6]

टिप्पणियाँ

[6] (16-19) इन आयतों का भावार्थ यह है कि वास्तव में रोग यह है कि काफ़िरों को सांसारिक स्वार्थ के कारण नबी की बातें अच्छी नहीं लगतीं। जबकि परलोक ही स्थायी है। और यही सभी आदि ग्रंथों की शिक्षा है।

ऑनलाइन क़ुरआन पढ़ने के बारे में सवाल

क्या सूरह Al-A'la मक्की है या मदनी?

इस रीडर के डेटा (Tanzil) में सूरह Al-A'la को मक्की माना गया है।

सूरह Al-A'la से पहले और बाद में कौन-सी सूरतें आती हैं?

यह At-Tariq के बाद और Al-Ghashiyah से पहले आती है।

क्या मैं सूरह Al-A'la अपनी भाषा में पढ़ सकता हूँ?

जी हाँ। पाठ के ऊपर से 81 भाषाओं के 130 अनुवादों में से कोई चुनें, या सिर्फ़ अरबी पाठ पढ़ें।

क्या मैं सूरह Al-A'la सुन सकता हूँ?

जी हाँ। आयत-दर-आयत सुनने के लिए «सूरह सुनें» दबाएँ, या किसी आयत के पास प्ले बटन। 50 क़ारियों में से किसी एक को चुनें; रिकॉर्डिंग EveryAyah.com से तभी स्ट्रीम होती है जब आप प्ले दबाते हैं।

अरबी पाठ: Tanzil Project (tanzil.net), ज्यों का त्यों। अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari (QuranEnc.com, version 1.1.5), बिना किसी बदलाव के। डेटा: quran-json (CC BY-SA 4.0). तिलावतें: EveryAyah.com (सिर्फ़ तब स्ट्रीम होती हैं जब आप प्ले दबाते हैं)। स्रोत और लाइसेंस