रुकूअ की दुआ (5 में से 5)
रुकूअ की दुआ। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।
“रुकूअ की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “रुकूअ की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 5 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Subḥāna dhil-jabarūti, walmalakūti, walkibriyā'i, wal`aẓamati”, और इसका अर्थ है: “तू पाक है, क़ुदरत, बादशाहत, जलाल और अज़मत का मालिक”। स्रोत: Abu Dawud 1/230, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
रुकूअ की दुआ: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Subḥāna dhil-jabarūti, walmalakūti, walkibriyā'i, wal`aẓamati.
हिंदी अर्थ
तू पाक है, क़ुदरत, बादशाहत, जलाल और अज़मत का मालिक।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “रुकूअ की दुआ” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Abu Dawud 1/230।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“रुकूअ की दुआ” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “रुकूअ की दुआ” के अंतर्गत आने वाली 5 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Subḥāna dhil-jabarūti, walmalakūti, walkibriyā'i, wal`aẓamati”, और इसका अर्थ है: “तू पाक है, क़ुदरत, बादशाहत, जलाल और अज़मत का मालिक”। स्रोत: Abu Dawud 1/230, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“रुकूअ की दुआ” की दुआ का अर्थ क्या है?
तू पाक है, क़ुदरत, बादशाहत, जलाल और अज़मत का मालिक।
“रुकूअ की दुआ” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Subḥāna dhil-jabarūti, walmalakūti, walkibriyā'i, wal`aẓamati.
“रुकूअ की दुआ” की दुआ का स्रोत क्या है?
Abu Dawud 1/230। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
संबंधित दुआएँ
- रुकूअ की दुआسُبْحانَ رَبِّيَ الْعَظيم (ثلاث مرات)मेरा रब पाक है, बुलंद और अज़ीम (अरबी में तीन बार)
- रुकूअ की दुआسُبْحانَكَ اللّهُمَّ رَبَّنا وَبِحَمْدِك،ऐ अल्लाह! ऐ हमारे रब! तू पाक है और तेरी ही तारीफ़ है। ऐ अल्लाह! मुझे बख़्श दे।
- रुकूअ की दुआسُبّوحٌ قُدّْوس، رَبُّ الملائِكَةِ وَالرُّوح(तू) पाक है, (तू) निहायत मुक़द्दस है, फ़रिश्तों और रूह का रब।
- रुकूअ की दुआاللّهُمَّ لَكَ رَكَعْتُऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रुकूअ किया और तुझ पर ईमान लाया और तेरे आगे सर-ए-तस्लीम ख़म किया। …