सलाम के बाद के अज़कार (8 में से 7)
सलाम के बाद के अज़कार। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।
“सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 8 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/515, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
सलाम के बाद के अज़कार: अरबी पाठ
उच्चारण (लिप्यंतरण)
Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lahu‘l-mulku wa lahu‘l-ḥamd yuḥyī wa yumīt wa huwa `alā kulli shay'in qadīr.
हिंदी अर्थ
अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है। वह ज़िंदगी देता है और मौत देता है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
कब और कैसे पढ़ें
हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सलाम के बाद के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।
स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।
यह दुआ कहाँ से है?
यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 5/515।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
“सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?
हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 8 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā ilāha illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/515, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।
“सलाम के बाद के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?
अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है। वह ज़िंदगी देता है और मौत देता है, और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।
“सलाम के बाद के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?
उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā ilāha illallāh waḥdahu lā sharīka lah, lahu‘l-mulku wa lahu‘l-ḥamd yuḥyī wa yumīt wa huwa `alā kulli shay'in qadīr.
“सलाम के बाद के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?
At-Tirmidhi 5/515। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।
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