सलाम के बाद के अज़कार (8 में से 3)

सलाम के बाद के अज़कार। अज़ान, मस्जिद, नमाज़ के अंदर और बाद।

“सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 8 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā 'ilāha 'illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Muslim 1/415, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

सलाम के बाद के अज़कार: अरबी पाठ

لا إلهَ إلاّ اللّهوحدَهُ لا شريكَ لهُلهُ الملكُ ولهُ الحَمدوهوَ على كلّ شيءٍ قديرلا حَوْلَ وَلا قوَّةَ إِلاّ بِاللهِلا إلهَ إلاّ اللّهوَلا نَعْبُدُ إِلاّ إيّاهلَهُ النِّعْمَةُ وَلَهُ الفَضْلوَلَهُ الثَّناءُ الحَسَنلا إلهَ إلاّ اللّهُمخْلِصينَ لَهُ الدِّينَوَلَوْ كَرِهَ الكافِرون

उच्चारण (लिप्यंतरण)

Lā 'ilāha 'illallāh, waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku, wa lahul-ḥamd, wa huwa `alā kulli shay'in qadīr. Lā ḥawla wa lā quwwata 'illā billāh, lā 'ilāha 'illallāh, wa lā na`budu 'illā 'iyyāh, lahun-ni`matu wa lahul-faḍl, wa lahuth-thanā'ul-ḥasan, lā 'ilāha 'illallāh, mukhliṣīna lahud-dīn, wa law karihal-kāfirūn.

हिंदी अर्थ

अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं, उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और हम उसके सिवा किसी की इबादत नहीं करते। उसी का फ़ज़्ल है, उसी की नेमत है, और उसी के लिए बेहतरीन तारीफ़ है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। (हम) उसी के लिए दीन को ख़ालिस करते हैं, चाहे काफ़िरों को बुरा लगे।

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “सलाम के बाद के अज़कार” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: Muslim 1/415।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “सलाम के बाद के अज़कार” के अंतर्गत आने वाली 8 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “Lā 'ilāha 'illallāh”, और इसका अर्थ है: “अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं”। स्रोत: Muslim 1/415, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“सलाम के बाद के अज़कार” की दुआ का अर्थ क्या है?

अल्लाह अकेले के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, उसका कोई साझी नहीं, उसी की बादशाहत है और उसी के लिए हर प्रशंसा है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है। गुनाह से बचने की ताक़त और नेकी की शक्ति केवल अल्लाह की तौफ़ीक़ से है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं, और हम उसके सिवा किसी की इबादत नहीं करते। उसी का फ़ज़्ल है, उसी की नेमत है, और उसी के लिए बेहतरीन तारीफ़ है। अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। (हम) उसी के लिए दीन को ख़ालिस करते हैं, चाहे काफ़िरों को बुरा लगे।

“सलाम के बाद के अज़कार” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): Lā 'ilāha 'illallāh, waḥdahu lā sharīka lah, lahul-mulku, wa lahul-ḥamd, wa huwa `alā kulli shay'in qadīr. Lā ḥawla wa lā quwwata 'illā billāh, lā 'ilāha 'illallāh, wa lā na`budu 'illā 'iyyāh, lahun-ni`matu wa lahul-faḍl, wa lahuth-thanā'ul-ḥasan, lā 'ilāha 'illallāh, mukhliṣīna lahud-dīn, wa law karihal-kāfirūn.

“सलाम के बाद के अज़कार” की दुआ का स्रोत क्या है?

Muslim 1/415। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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