सूरह Adh-Dhariyat الذاريات

60 आयतें · मक्की

सूरह Adh-Dhariyat में कितनी आयतें हैं?

सूरह Adh-Dhariyat क़ुरआन की 114 सूरतों में 51वीं सूरह है और इसमें 60 आयतें हैं। इसे मक्की माना जाता है।

सूरह का क्रम
51 / 114
आयतें
60
वर्गीकरण
मक्की

29 अक्टूबर 2026 को अपडेट किया. Tanzil Project (tanzil.net), quran-json.

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بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

وَٱلذَّٰرِيَٰتِ ذَرْوًا ١

क़सम है उन (हवाओं) की जो (धूल आदि) उड़ाने वाली हैं!

فَٱلْحَٰمِلَٰتِ وِقْرًا ٢

फिर पानी का बड़ा भारी बोझ उठाने वाले बादलों की!

فَٱلْجَٰرِيَٰتِ يُسْرًا ٣

फिर आसानी से चलने वाली नावों की!

فَٱلْمُقَسِّمَٰتِ أَمْرًا ٤

फिर (अल्लाह का) आदेश बाँटने वाले (फ़रिश्तों की)!

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ ٥

निःसंदेह जो तुमसे वादा किया जाता है, निश्चय वह सत्य है।[1]

टिप्पणियाँ

[1] इन आयतों में हवाओं की शपथ ली गई है कि हवा (वायु) तथा वर्षा की यह व्यवस्था गवाह है कि प्रलय तथा परलोक का वचन सत्य तथा न्याय का होना आवश्यक है।

وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعٌ ٦

तथा निःसंदेह हिसाब अनिवार्य रूप से घटित होने वाला है।

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلْحُبُكِ ٧

क़सम है रास्तों वाले आकाश की!

إِنَّكُمْ لَفِى قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ ٨

निःसंदेह तुम निश्चय एक विवादास्पद बात[2] में पड़े हो।

टिप्पणियाँ

[2] अर्थात क़ुरआन तथा प्रलय के विषय में विभिन्न बातें कर रहे हैं।

يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ ٩

उससे वही फेरा जाता है, जो (अल्लाह के ज्ञान में) फेर दिया गया है।

قُتِلَ ٱلْخَرَّٰصُونَ ١٠

अटकल लगाने वाले मारे गए।

ٱلَّذِينَ هُمْ فِى غَمْرَةٍ سَاهُونَ ١١

जो बड़ी ग़फ़लत में भूले हुए हैं।

يَسْـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ ٱلدِّينِ ١٢

वे पूछते[3] हैं कि बदले का दिन कब है?

टिप्पणियाँ

[3] अर्थात उपहास स्वरूप पूछते हैं।

يَوْمَ هُمْ عَلَى ٱلنَّارِ يُفْتَنُونَ ١٣

जिस दिन वे आग पर तपाए जाएँगे।

ذُوقُوا۟ فِتْنَتَكُمْ هَٰذَا ٱلَّذِى كُنتُم بِهِۦ تَسْتَعْجِلُونَ ١٤

अपने फ़ितने (यातना) का मज़ा चखो, यही है जिसके लिए तुम जल्दी मचा रहे थे।

إِنَّ ٱلْمُتَّقِينَ فِى جَنَّٰتٍ وَعُيُونٍ ١٥

निःसंदेह परहेज़गार लोग बाग़ों और जल स्रोतों में होंगे।

ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمْ رَبُّهُمْ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَ ١٦

जो कुछ उनका रब उन्हें देगा, उसे वे लेने वाले होंगे। निश्चय ही वे इससे पहले नेकी करने वाले थे।

كَانُوا۟ قَلِيلًا مِّنَ ٱلَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَ ١٧

वे रात के बहुत थोड़े भाग में सोते थे।[4]

टिप्पणियाँ

[4] अर्थात अपना अधिक समय अल्लाह के स्मरण में लगाते थे। जैसे तहज्जुद की नमाज़ और तस्बीह़ आदि।

وَبِٱلْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ ١٨

तथा रात्रि की अंतिम घड़ियों[5] में वे क्षमा याचना करते थे।

टिप्पणियाँ

[5] ह़दीस में है कि अल्लाह प्रत्येक रात में जब तिहाई रात रह जाए, तो संसार के आकाश की ओर उतरता है। और कहता है : है कोई जो मुझे पुकारे, तो मैं उसकी पुकार सुनूँ? है कोई जो माँगे, तो मैं उसे दूँ? है कोई जो मुझ से क्षमा माँगे, तो मैं उसे क्षमा कर दूँ? ( बुख़ारी : 1145, मुस्लिम : 758)

وَفِىٓ أَمْوَٰلِهِمْ حَقٌّ لِّلسَّآئِلِ وَٱلْمَحْرُومِ ١٩

और उनके धनों में माँगने वाले तथा वंचित[6] के लिए एक हक़ (हिस्सा) था।

टिप्पणियाँ

[6] अर्थात जो निर्धन होते हुए भी नहीं माँगता था, इसलिए उसे नहीं मिलता था।

وَفِى ٱلْأَرْضِ ءَايَٰتٌ لِّلْمُوقِنِينَ ٢٠

तथा धरती में विश्वास करने वालों के लिए बहुत-सी निशानियाँ हैं।

وَفِىٓ أَنفُسِكُمْ أَفَلَا تُبْصِرُونَ ٢١

तथा स्वयं तुम्हारे भीतर (भी)। तो क्या तुम नहीं देखते?

وَفِى ٱلسَّمَآءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ ٢٢

और आकाश ही में तुम्हारी रोज़ी[7] है तथा वह भी जिसका तुमसे वादा किया जा रहा है।

टिप्पणियाँ

[7] अर्थात आकाश की वर्षा तुम्हारी जीविका का साधन बनती है। तथा स्वर्ग आकाश में है।

فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلْأَرْضِ إِنَّهُۥ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَآ أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ ٢٣

सो क़सम है आकाश एवं धरती के पालनहार की! निःसंदेह यह बात निश्चित रूप से सत्य है, इस बात की तरह कि निःसंदेह तुम बोलते हो।[8]

टिप्पणियाँ

[8] अर्थात अपने बोलने का विश्वास है।

هَلْ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَٰهِيمَ ٱلْمُكْرَمِينَ ٢٤

क्या आपके पास इबराहीम के सम्मानित अतिथियों की सूचना आई है?

إِذْ دَخَلُوا۟ عَلَيْهِ فَقَالُوا۟ سَلَٰمًا قَالَ سَلَٰمٌ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ ٢٥

जब वे उसके पास आए, तो उन्होंने सलाम कहा। उसने कहा : सलाम हो। कुछ अपरिचित लोग हैं।

فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهْلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجْلٍ سَمِينٍ ٢٦

फिर वह चुपके से अपने घरवालों के पास गया। फिर एक मोटा-ताज़ा (भुना हुआ) बछड़ा ले आया।

فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ ٢٧

फिर उसे उनके सामने रख दिया। कहा : क्या तुम नहीं खाते?

فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً قَالُوا۟ لَا تَخَفْ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَٰمٍ عَلِيمٍ ٢٨

तो उसने उनसे दिल में डर महसूस किया। उन्होंने कहा : डरो नहीं। और उन्होंने उसे एक बहुत ही ज्ञानी पुत्र की शुभ-सूचना दी।

فَأَقْبَلَتِ ٱمْرَأَتُهُۥ فِى صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ ٢٩

यह सुनकर उसकी पत्नी चिल्लाती हुई आगे आई, तो उसने अपना चेहरा पीट लिया और बोली : बूढ़ी बाँझ!

قَالُوا۟ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلْحَكِيمُ ٱلْعَلِيمُ ٣٠

उन्होंने कहा : तेरे पालनहार ने ऐसे ही फरमाया है। निश्चय वही पूर्ण हिकमत वाला, अत्यंत ज्ञानी है।

قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا ٱلْمُرْسَلُونَ ٣١

उसने कहा : ऐ भेजे हुए (दूतो!) तुम्हारा अभियान क्या है?

قَالُوٓا۟ إِنَّآ أُرْسِلْنَآ إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ ٣٢

उन्होंने कहा : निःसंदेह हम कुछ अपराधी लोगों की ओर भेजे गए हैं।

لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن طِينٍ ٣٣

ताकि हम उनपर मिट्टी के पत्थर बरसाएँ।

مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ ٣٤

जो तुम्हारे पालनहार के पास से सीमा से आगे बढ़ने वालों के लिए चिह्नित[9] हैं।

टिप्पणियाँ

[9] अर्थात प्रत्येक पत्थर पर पापी का नाम है।

فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٣٥

फिर हमने उस (बस्ती) में जो भी ईमानवाले थे उन्हें निकाल लिया।

فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ ٱلْمُسْلِمِينَ ٣٦

तो हमने उसमें मुसलमानों के एक घर[10] के सिवा कोई और नहीं पाया।

टिप्पणियाँ

[10] जो आदरणीय लूत (अलैहिस्सलाम) का घर था।

وَتَرَكْنَا فِيهَآ ءَايَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلْعَذَابَ ٱلْأَلِيمَ ٣٧

तथा हमने उसमें उन लोगों के लिए एक निशानी छोड़ दी, जो दुःखदायी यातना से डरते हैं।

وَفِى مُوسَىٰٓ إِذْ أَرْسَلْنَٰهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَٰنٍ مُّبِينٍ ٣٨

तथा मूसा (की कहानी) में (भी एक निशानी है), जब हमने उसे फ़िरऔन की ओर एक स्पष्ट प्रमाण देकर भेजा।

فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِۦ وَقَالَ سَٰحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ ٣٩

तो उसने अपनी शक्ति के कारण मुँह फेर लिया और उसने कहा : यह जादूगर है, या पागल।

فَأَخَذْنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذْنَٰهُمْ فِى ٱلْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ ٤٠

अंततः हमने उसे और उसकी सेनाओं को पकड़ लिया, फिर उन्हें समुद्र में फेंक दिया, जबकि वह एक निंदनीय काम करने वाला था।

وَفِى عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلْعَقِيمَ ٤١

तथा आद में, जब हमने उनपर बाँझ[11] हवा भेजी दी।

टिप्पणियाँ

[11] अर्थात अशुभ। (देखिए : सूरतुल-ह़ाक़्क़ा, आयत : 7)

مَا تَذَرُ مِن شَىْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَٱلرَّمِيمِ ٤٢

वह जिस चीज़ पर से भी गुज़रती, उसे सड़ी हुई हड्डी की तरह कर देती थी।

وَفِى ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا۟ حَتَّىٰ حِينٍ ٤٣

तथा समूद में, जब उनसे कहा गया कि एक समय तक के लिए लाभ उठा लो।

فَعَتَوْا۟ عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ ٤٤

फिर उन्होंने अपने पालनहार के आदेश की अवज्ञा की, तो उन्हें कड़क ने पकड़ लिया और वे देख रहे थे।

فَمَا ٱسْتَطَٰعُوا۟ مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا۟ مُنتَصِرِينَ ٤٥

फिर उनमें न तो खड़े होने की शक्ति थी और न ही वे प्रतिकार करने वाले थे।

وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ إِنَّهُمْ كَانُوا۟ قَوْمًا فَٰسِقِينَ ٤٦

तथा इससे पहले नूह़ की जाति को (विनष्ट कर दिया)। निश्चय ही वे अवज्ञाकारी लोग थे।[12]

टिप्पणियाँ

[12] आयत 31 से 46 तक नबियों तथा विगत जातियों के परिणाम की ओर निरंतर संकेत करके सावधान किया गया है कि अल्लाह के बदले का नियम बराबर काम कर रहा है।

وَٱلسَّمَآءَ بَنَيْنَٰهَا بِأَيْي۟دٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ ٤٧

तथा आकाश को हमने शक्ति के साथ बनाया और निःसंदेह हम निश्चय विस्तार करने वाले हैं।

وَٱلْأَرْضَ فَرَشْنَٰهَا فَنِعْمَ ٱلْمَٰهِدُونَ ٤٨

तथा धरती को हमने बिछा दिया, तो हम क्या ही खूब बिछाने वाले हैं।

وَمِن كُلِّ شَىْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ ٤٩

तथा हमने हर चीज़ के दो प्रकार बनाए, ताकि तुम नसीहत ग्रहण करो।

فَفِرُّوٓا۟ إِلَى ٱللَّهِ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ ٥٠

अतः अल्लाह की ओर दौड़ो। निश्चय ही मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से स्पष्ट सचेतकर्ता हूँ।

وَلَا تَجْعَلُوا۟ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ إِنِّى لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ ٥١

और अल्लाह के साथ कोई दूसरा पूज्य मत बनाओ। निःसंदेह मैं तुम्हारे लिए उसकी ओर से खुला डराने वाला हूँ।

كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا۟ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ ٥٢

इसी प्रकार, उन लोगों के पास जो इनसे पहले थे, जब भी कोई रसूल आया, तो उन्होंने कहा : यह जादूगर है, या पागल।

أَتَوَاصَوْا۟ بِهِۦ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ ٥٣

क्या उन्होंने एक-दूसरे को इस (बात) की वसीयत[13] की है? बल्कि वे (स्वयं ही) सरकश लोग हैं।

टिप्पणियाँ

[13] जब सभी ने एक ही बात कही, तो सवाल उठता है कि क्या ये सब एक-दूसरे को वसीयत कर गए हैं? यह संभव नहीं है कि उन्होंने एक-दूसरे को इसकी वसीयत की हो। इसलिए तथ्य यह है कि वे सरकश लोग हैं।

فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومٍ ٥٤

अतः आप उनसे मुँह फेर लें। क्योंकि आपपर कोई दोष नहीं है।

وَذَكِّرْ فَإِنَّ ٱلذِّكْرَىٰ تَنفَعُ ٱلْمُؤْمِنِينَ ٥٥

तथा आप नसीहत करें। क्योंकि निश्चय नसीहत ईमानवालों को लाभ देताी है।

وَمَا خَلَقْتُ ٱلْجِنَّ وَٱلْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ ٥٦

और मैंने जिन्नों तथा मनुष्यों को केवल इसलिए पैदा किया है कि वे मेरी इबादत करें।

مَآ أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِ ٥٧

मैं उनसे कोई रोज़ी नहीं चाहता और न यह चाहता हूँ कि वे मुझे खिलाएँ।

إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلْقُوَّةِ ٱلْمَتِينُ ٥٨

निःसंदेह अल्लाह ही बहुत रोज़ी देनेवाला, बड़ा शक्तिशाली, अत्यंत मज़बूत है।

فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا۟ ذَنُوبًا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَٰبِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ ٥٩

अतः निश्चय उन लोगों के लिए जिन्होंने अत्याचार किया, उनके साथियों के हिस्से की तरह (यातना का) एक हिस्सा है। सो वे मुझसे जल्दी न मचाएँ।

فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا۟ مِن يَوْمِهِمُ ٱلَّذِى يُوعَدُونَ ٦٠

अतः इनकार करने वालों के लिए उनके उस दिन[14] से बड़ा विनाश है, जिसका उनसे वादा किया जा रहा है।

टिप्पणियाँ

[14] अर्थात प्रलय के दिन।

ऑनलाइन क़ुरआन पढ़ने के बारे में सवाल

क्या सूरह Adh-Dhariyat मक्की है या मदनी?

इस रीडर के डेटा (Tanzil) में सूरह Adh-Dhariyat को मक्की माना गया है।

सूरह Adh-Dhariyat से पहले और बाद में कौन-सी सूरतें आती हैं?

यह Qaf के बाद और At-Tur से पहले आती है।

क्या मैं सूरह Adh-Dhariyat अपनी भाषा में पढ़ सकता हूँ?

जी हाँ। पाठ के ऊपर से 81 भाषाओं के 130 अनुवादों में से कोई चुनें, या सिर्फ़ अरबी पाठ पढ़ें।

क्या मैं सूरह Adh-Dhariyat सुन सकता हूँ?

जी हाँ। आयत-दर-आयत सुनने के लिए «सूरह सुनें» दबाएँ, या किसी आयत के पास प्ले बटन। 50 क़ारियों में से किसी एक को चुनें; रिकॉर्डिंग EveryAyah.com से तभी स्ट्रीम होती है जब आप प्ले दबाते हैं।

अरबी पाठ: Tanzil Project (tanzil.net), ज्यों का त्यों। अनुवाद: Azizul Haq Al-Omari (QuranEnc.com, version 1.1.5), बिना किसी बदलाव के। डेटा: quran-json (CC BY-SA 4.0). तिलावतें: EveryAyah.com (सिर्फ़ तब स्ट्रीम होती हैं जब आप प्ले दबाते हैं)। स्रोत और लाइसेंस