नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत (5 में से 3)

नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत। सलाम, तारीफ़, शुक्र, छींक, ग़ुस्सा।

“नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 5 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “नबी ﷺ ने फ़रमाया: “कंजूस वह है जिसके सामने मेरा ज़िक्र हो और वह मुझ पर दुरूद न भेजे”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/551, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत: अरबी पाठ

وَقَالَ صلى الله عليه وسلم: (الْبَخِيلُ مَنْ ذُكِرْتُ عِنْدَهُ فَلَمْ يُصَلِّ عَلَيَّ)

उच्चारण (लिप्यंतरण)

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हिंदी अर्थ

नबी ﷺ ने फ़रमाया: “कंजूस वह है जिसके सामने मेरा ज़िक्र हो और वह मुझ पर दुरूद न भेजे।”

कब और कैसे पढ़ें

हिस्न अल-मुस्लिम ने यह दुआ “नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” शीर्षक के अंतर्गत दी है।

स्रोत में दोहराने की कोई निश्चित संख्या नहीं दी गई है।

यह दुआ कहाँ से है?

यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम से है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है और सईद बिन अली अल-क़हतानी ने संकलित किया। स्रोत: At-Tirmidhi 5/551।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

“नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत कौन-सी दुआ है?

हिस्न अल-मुस्लिम में “नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” के अंतर्गत आने वाली 5 दुआओं में से एक इस तरह शुरू होती है: “--”, और इसका अर्थ है: “नबी ﷺ ने फ़रमाया: “कंजूस वह है जिसके सामने मेरा ज़िक्र हो और वह मुझ पर दुरूद न भेजे”। स्रोत: At-Tirmidhi 5/551, और यह हिस्न अल-मुस्लिम में संकलित है।

“नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” की दुआ का अर्थ क्या है?

नबी ﷺ ने फ़रमाया: “कंजूस वह है जिसके सामने मेरा ज़िक्र हो और वह मुझ पर दुरूद न भेजे।

“नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” की दुआ कैसे पढ़ी जाती है?

उच्चारण (लिप्यंतरण): --

“नबी ﷺ पर दुरूद भेजने की फ़ज़ीलत” की दुआ का स्रोत क्या है?

At-Tirmidhi 5/551। यह दुआ हिस्न अल-मुस्लिम में है, जो क़ुरआन और सुन्नत की दुआओं का संग्रह है।

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