इमाम अली रज़ा की विलादत शुभकामना कार्ड

संदेश लिखें, अपना शहर जोड़ें और इमाम अली रज़ा की विलादत के लिए बना कार्ड साझा करें। मुफ़्त, बिना खाते के, कुछ भी सहेजा नहीं जाता।

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आपका शहर संदेश में आपके शहर के नमाज़ के समय का लिंक जोड़ता है।

अपना कार्ड भेजें

आपके नाम और संदेश लिंक के भीतर चलते हैं और आपके ब्राउज़र में रहते हैं। Awqatly उन्हें प्राप्त या सहेजता नहीं है।

इमाम अली रज़ा की विलादत क्या है और कब है?

आठवें इमाम, जो मशहद में दफ़न हैं।

अगला मौक़ा (इमाम अली रज़ा की विलादत) रविवार, 18 अप्रैल 2027 (11 ज़ीक़ादा 1448 हि.) को है। तारीख़ें उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार हैं और जहाँ स्थानीय चाँद देखने का पालन होता है वहाँ एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है।

इमाम अली रज़ा की विलादत पर क्या लिखें?

गर्मजोशी और छोटी-सी दुआ के साथ मुबारकबाद दें। इस दिन के पारंपरिक अरबी शब्द हैं: “ولادة مباركة”।

कार्ड कैसे भेजें

  1. मौक़ा चुनें और अपना संदेश लिखें।
  2. नाम जोड़ें और अपना शहर चुनें।
  3. अपने कार्ड का पूर्वावलोकन देखें।
  4. कार्ड साझा करें, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, ईमेल या एसएमएस दबाएँ, या तस्वीर डाउनलोड करें।

इमाम अली रज़ा की विलादत कार्ड के बारे में सवाल

इमाम अली रज़ा की विलादत कार्ड कैसे भेजें?

फ़ॉर्म में संदेश लिखें, अपना शहर चुनें और कार्ड साझा करें, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, ईमेल या एसएमएस दबाएँ। फ़ोन पर ऐप आपके तैयार कार्ड के साथ खुल जाता है।

क्या इमाम अली रज़ा की विलादत कार्ड मुफ़्त है? क्या खाता चाहिए?

यह मुफ़्त है और खाता नहीं चाहिए। आपके नाम और संदेश लिंक के भीतर चलते हैं और आपके ब्राउज़र में रहते हैं; Awqatly उन्हें प्राप्त या सहेजता नहीं है।

इमाम अली रज़ा की विलादत पर सही मुबारकबाद क्या है?

गर्मजोशी और छोटी-सी दुआ के साथ मुबारकबाद दें। इस दिन के पारंपरिक अरबी शब्द हैं: “ولادة مباركة”।

इमाम अली रज़ा की विलादत कब है?

अगला मौक़ा (इमाम अली रज़ा की विलादत) रविवार, 18 अप्रैल 2027 (11 ज़ीक़ादा 1448 हि.) को है। तारीख़ें उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार हैं और जहाँ स्थानीय चाँद देखने का पालन होता है वहाँ एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है।

क्या मैं कार्ड दूसरी भाषा में बना सकता हूँ?

जी हाँ। फ़ॉर्म में कार्ड की भाषा चुनें: कार्ड का पाठ साइट की 13 भाषाओं में उपलब्ध है और अरबी ख़ुशख़ती वही रहती है।

क्या सुन्नी और शिया मौक़ों के कार्ड अलग हैं?

जी हाँ। हर मौक़ा सुन्नी या शिया कैलेंडर के अनुसार है। ख़ुशी के दिनों में मुबारकबाद दी जाती है, और याद या शोक के दिनों में “मुबारक” की जगह सलाम और संवेदना के शब्द लिखे जाते हैं।

हर मौक़े के लिए इस्लामी शुभकामना कार्ड