अरफ़ा का दिन शुभकामना कार्ड
संदेश लिखें, अपना शहर जोड़ें और अरफ़ा का दिन के लिए बना कार्ड साझा करें। मुफ़्त, बिना खाते के, कुछ भी सहेजा नहीं जाता।
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संदेश के लिए विचार
अपना कार्ड भेजें
आपके नाम और संदेश लिंक के भीतर चलते हैं और आपके ब्राउज़र में रहते हैं। Awqatly उन्हें प्राप्त या सहेजता नहीं है।
अरफ़ा का दिन क्या है और कब है?
सुन्नी: हाजी अरफ़ात में ठहरते हैं; हज पर न गए लोगों के लिए मुस्तहब रोज़ा।
शिया: इमाम हुसैन की दुआ-ए-अरफ़ा का दिन, और कूफ़ा में उनके दूत मुस्लिम इब्न अक़ील की शहादत।
अगला मौक़ा (अरफ़ा का दिन) शनिवार, 15 मई 2027 (9 ज़ुल हिज्जा 1448 हि.) को है। तारीख़ें उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार हैं और जहाँ स्थानीय चाँद देखने का पालन होता है वहाँ एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है।
अरफ़ा का दिन पर क्या लिखें?
दुआ और बरकत की कामना सबसे अच्छी मुबारकबाद है। इस दिन के पारंपरिक अरबी शब्द हैं: “يوم عرفة”।
कार्ड कैसे भेजें
- मौक़ा चुनें और अपना संदेश लिखें।
- नाम जोड़ें और अपना शहर चुनें।
- अपने कार्ड का पूर्वावलोकन देखें।
- कार्ड साझा करें, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, ईमेल या एसएमएस दबाएँ, या तस्वीर डाउनलोड करें।
अरफ़ा का दिन कार्ड के बारे में सवाल
अरफ़ा का दिन कार्ड कैसे भेजें?
फ़ॉर्म में संदेश लिखें, अपना शहर चुनें और कार्ड साझा करें, व्हाट्सऐप, टेलीग्राम, ईमेल या एसएमएस दबाएँ। फ़ोन पर ऐप आपके तैयार कार्ड के साथ खुल जाता है।
क्या अरफ़ा का दिन कार्ड मुफ़्त है? क्या खाता चाहिए?
यह मुफ़्त है और खाता नहीं चाहिए। आपके नाम और संदेश लिंक के भीतर चलते हैं और आपके ब्राउज़र में रहते हैं; Awqatly उन्हें प्राप्त या सहेजता नहीं है।
अरफ़ा का दिन पर सही मुबारकबाद क्या है?
दुआ और बरकत की कामना सबसे अच्छी मुबारकबाद है। इस दिन के पारंपरिक अरबी शब्द हैं: “يوم عرفة”।
अरफ़ा का दिन कब है?
अगला मौक़ा (अरफ़ा का दिन) शनिवार, 15 मई 2027 (9 ज़ुल हिज्जा 1448 हि.) को है। तारीख़ें उम्म अल-क़ुरा कैलेंडर के अनुसार हैं और जहाँ स्थानीय चाँद देखने का पालन होता है वहाँ एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है।
क्या मैं कार्ड दूसरी भाषा में बना सकता हूँ?
जी हाँ। फ़ॉर्म में कार्ड की भाषा चुनें: कार्ड का पाठ साइट की 13 भाषाओं में उपलब्ध है और अरबी ख़ुशख़ती वही रहती है।
क्या सुन्नी और शिया मौक़ों के कार्ड अलग हैं?
जी हाँ। हर मौक़ा सुन्नी या शिया कैलेंडर के अनुसार है। ख़ुशी के दिनों में मुबारकबाद दी जाती है, और याद या शोक के दिनों में “मुबारक” की जगह सलाम और संवेदना के शब्द लिखे जाते हैं।